नमक की ढुलाई के लिए अब नया तरीका अपनाया जा रहा है। स्टेनलेस स्टील से बने खास कंटेनर का पहला सफल परीक्षण किया गया है। इस ट्रायल को रेलवे के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। परीक्षण के दौरान रेलवे बोर्ड के अधिकारी मौजूद रहे और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जुड़े। उन्होंने खुद इस ट्रायल की सफलता की जानकारी साझा की। माना जा रहा है कि इससे माल ढुलाई का सिस्टम ज्यादा सुरक्षित और तेज होगा।
कहां हुआ ट्रायल और क्यों है खास?
यह परीक्षण अहमदाबाद डिविजन के भीमासर–गांधीधाम सेक्शन में किया गया। रेलवे का कहना है कि यह सिर्फ एक ट्रायल नहीं, बल्कि माल परिवहन में बड़े बदलाव की शुरुआत है। अभी तक नमक खुले वैगनों में ढोया जाता था, जिससे नुकसान और सफाई की दिक्कत होती थी। कंटेनर सिस्टम से यह समस्या कम होगी और पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा।
लोडिंग हुई बेहद तेज
इस नए कंटेनर को खास डिजाइन के साथ तैयार किया गया है। ऊपर की तरफ बड़े ओपनिंग दिए गए हैं, जिनसे साइलो या मशीन की मदद से सीधे नमक भरा जा सकता है। ट्रायल के दौरान हर कंटेनर को भरने में 15 मिनट से भी कम समय लगा। कुल 28 मशीन बकेट से एक कंटेनर में नमक डाला गया। तेज लोडिंग से समय की बचत होगी और काम आसान बनेगा।
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अनलोडिंग भी मिनटों में पूरी
सिर्फ लोडिंग ही नहीं, नमक खाली करना भी बेहद आसान है। कंटेनर को हाइड्रोलिक टिपर से करीब 45 डिग्री तक झुकाया गया और 5 मिनट से कम समय में पूरा नमक खाली हो गया। साइड में दिए गए दरवाजों से नमक सीधे नीचे गिर जाता है। खास बात यह रही कि कंटेनर खाली होने के बाद उसमें कोई अवशेष नहीं बचा और अतिरिक्त सफाई की जरूरत भी नहीं पड़ी।
कितना वजन और कितनी क्षमता?
स्टेनलेस स्टील 304 ग्रेड शीट से बने इस कंटेनर का खाली वजन लगभग 3 टन है। इसमें एक बार में करीब 33.5 टन नमक भरा जा सकता है। ट्रायल के दौरान 35 टन तक लोड किया गया और तब भी जगह बची रही। तेज लोडिंग और अनलोडिंग से वैगन का टर्नअराउंड टाइम कम होगा और रेलवे की कामकाजी क्षमता बढ़ेगी।
किसने बनाया और क्या होगा फायदा?
यह कंटेनर हरियाणा के रेवाड़ी स्थित कंपनी कल्याणी कास्ट टेक लिमिटेड ने तैयार किया है। ट्रायल के लिए स्टेनलेस स्टील शीट जिंदल स्टेनलेस कंपनी ने मुफ्त में उपलब्ध कराई। कंपनी का दावा है कि इस कंटेनर की उम्र करीब 15 साल तक हो सकती है। पहले माइल्ड स्टील के डिब्बों को नमक की वजह से जल्दी नुकसान होता था। अब लागत कम होगी और लॉजिस्टिक व्यवस्था ज्यादा मजबूत बनेगी।