Railway Recruitment Violence Case: राज ठाकरे को 2008 के रेलवे भर्ती आंदोलन से जुड़े मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। ठाणे सत्र न्यायालय ने सबूतों के अभाव में उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष राज ठाकरे की कथित भूमिका और आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका।
रेलवे भर्ती आंदोलन से जुड़ा था मामला
यह मामला साल 2008 में रेलवे भर्ती परीक्षा के दौरान कल्याण रेलवे स्टेशन पर हुई हिंसा से जुड़ा था। आरोप था कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ताओं ने उत्तर भारतीय अभ्यर्थियों के साथ मारपीट की थी और रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया था। घटना के बाद राज ठाकरे समेत सात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।
भड़काऊ बयान देने का भी आरोप
अभियोजन पक्ष का दावा था कि राज ठाकरे ने ऐसे बयान दिए थे, जिनसे गैर-स्थानीय लोगों के खिलाफ माहौल बना। उन पर आरोप था कि उन्होंने मराठी युवाओं की नौकरियां बाहरी राज्यों के लोग छीनने जैसी बातें कहकर आंदोलन को बढ़ावा दिया। हालांकि अदालत ने माना कि इन आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत पेश नहीं किए जा सके।
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कोर्ट में खुद पेश हुए थे राज ठाकरे
इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान राज ठाकरे अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए थे। उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए न्यायिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग करने की बात कही थी। फैसले के दिन भी वे अदालत में मौजूद रहे।
समर्थकों में खुशी का माहौल
अदालत के फैसले के बाद मनसे कार्यकर्ताओं और समर्थकों में खुशी देखी गई। पार्टी नेताओं ने इसे न्याय की जीत बताया है। वहीं राजनीतिक गलियारों में भी इस फैसले को महाराष्ट्र की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।