राजस्थान में मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की पांचवीं किस्त जारी होते ही कई किसानों के चेहरे खिल गए, लेकिन बड़ी संख्या में किसान ऐसे भी रहे जिनके खातों में एक भी रुपया नहीं आया। खेतों में काम करते समय जब किसानों ने मोबाइल पर बैंक मैसेज चेक किया, तब पता चला कि करीब 9 लाख किसानों को इस बार किस्त नहीं मिली। इसके बाद गांव-गांव में यही सवाल उठने लगा कि आखिर पैसा क्यों अटक गया और गलती कहां हुई।
कितने किसानों को मिला पैसा
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सिरोही जिले में आयोजित कार्यक्रम से इस किस्त को जारी किया। सरकार ने प्रदेश के 65,30,752 किसानों के खातों में करीब 663 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। इस किस्त में हर पात्र किसान को 1000 रुपये दिए गए। राजस्थान के किसानों को सालाना कुल 9000 रुपये मिलते हैं, जिसमें 6000 रुपये पीएम किसान योजना और 3000 रुपये राज्य सरकार की योजना से मिलते हैं।
9 लाख किसानों का नाम क्यों कटा
सरकारी जानकारी के मुताबिक इस बार करीब 9 लाख किसानों के नाम सूची से हटाए गए हैं। इसके पीछे कई वजह सामने आई हैं। कई किसानों की फार्मर आईडी नहीं बनी थी, कई ने पीएम किसान योजना की ई-केवाईसी पूरी नहीं की थी। कुछ मामलों में एक ही परिवार के दो लोगों का नाम दर्ज पाया गया, कहीं पति-पत्नी दोनों लाभ ले रहे थे, तो कहीं नाबालिग सदस्य का रजिस्ट्रेशन हो गया था।
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लिस्ट में नाम कैसे चेक करें
अगर आपके खाते में पैसा नहीं आया है तो सबसे पहले अपना नाम सूची में चेक करें। इसके लिए rajsahakar.rajasthan.gov.in वेबसाइट पर जाना होगा। वहां Citizen Corner में जाकर सीएम किसान सम्मान निधि योजना की स्थिति जानें विकल्प चुनें। जरूरी जानकारी भरते ही साफ पता चल जाएगा कि आपका नाम लाभार्थी सूची में है या नहीं और भुगतान क्यों रोका गया है।
पैसा अटका है तो अब क्या करें
जो किसान इस बार किस्त से बाहर रह गए हैं, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। अगर आपने फार्मर आईडी नहीं बनवाई है तो तुरंत बनवाएं। पीएम किसान योजना की ई-केवाईसी पूरी करें। अगर परिवार में एक से ज्यादा लोगों का नाम जुड़ा है तो सही व्यक्ति का नाम ही रखें। गलत जानकारी सुधारने के लिए नजदीकी ई-मित्र या कृषि कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है।
अगली किस्त पाने का रास्ता
सरकार का कहना है कि जिन किसानों की जानकारी सही हो जाएगी, उन्हें अगली किस्तों का लाभ मिल सकता है। इसलिए जरूरी है कि सभी दस्तावेज समय रहते अपडेट कराए जाएं। किसान अपनी छोटी सी लापरवाही की वजह से हर साल मिलने वाले 9000 रुपये से वंचित न रहें। सही जानकारी और समय पर सुधार ही अगली किस्त पाने का सबसे आसान रास्ता है।