राम मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है। यहां हर दिन बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं और दानपात्रों में नकद राशि, चेक और अन्य चढ़ावा देते हैं। हाल में दान राशि में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि मंदिर में दान का कैश आखिर कहां रखा जाता है और उसकी गिनती कैसे होती है।
मंदिर में बंद कमरों की जगह पांच मंडप
राम मंदिर की बनावट पारंपरिक घरों जैसी नहीं है। मंदिर नागर शैली में बना है और इसमें छोटे बंद कमरों की जगह बड़े खुले हॉल बनाए गए हैं, जिन्हें मंडप कहा जाता है। मंदिर में कुल पांच प्रमुख मंडप हैं। इनके नाम नृत्य मंडप, रंग मंडप, सभा मंडप, प्रार्थना मंडप और कीर्तन मंडप हैं। इन मंडपों में श्रद्धालुओं की आवाजाही, पूजा, भजन और धार्मिक कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई है।
दानपात्र से ग्रीन हाउस तक पहुंचता है कैश
मंदिर परिसर में लगे दानपात्रों से नकद राशि तय समय पर निकाली जाती है। इसके बाद कैश को सुरक्षा के बीच सीलबंद बक्सों में रखा जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार यह रकम मंदिर परिसर के पास बनी ग्रीन हाउस नाम की इमारत में पहुंचाई जाती है। इसी इमारत में नोटों की गिनती के लिए अलग काउंटिंग रूम बनाया गया है। यही जगह दान राशि के हिसाब-किताब का सबसे अहम केंद्र मानी जाती है।
बैंक कर्मचारी और ट्रस्ट टीम करती है गिनती
ग्रीन हाउस के काउंटिंग रूम में नोटों की गिनती मशीन और हाथ दोनों से की जाती है। इस काम में भारतीय स्टेट बैंक के कर्मचारी और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रतिनिधि शामिल रहते हैं। रोजाना करीब 11 बैंक कर्मचारी और ट्रस्ट की टीम दान राशि की गिनती करती है। नोटों को अलग-अलग मूल्य के हिसाब से बांधकर बंडल तैयार किए जाते हैं ताकि बैंक में जमा करते समय कोई परेशानी न हो।
कड़ी सुरक्षा में रखा जाता है हर नोट
काउंटिंग रूम में प्रवेश करने वालों के लिए सख्त नियम होते हैं। कर्मचारियों की तलाशी ली जाती है और ड्रेस कोड का पालन कराया जाता है। कमरे में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जाती है। गिनती पूरी होने के बाद कैश को फिर से सीलबंद बक्सों में रखा जाता है। इसके बाद बैंक की सुरक्षा व्यवस्था के साथ रकम को शाखा तक भेजा जाता है।
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जांच के बीच व्यवस्था पर बढ़ी नजर
दान राशि में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद पूरी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसियां दानपात्र से लेकर काउंटिंग रूम और बैंक में जमा होने तक की प्रक्रिया की पड़ताल कर रही हैं। श्रद्धालुओं की मांग है कि दान की हर रकम का साफ हिसाब रखा जाए और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाए। जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा कि कहीं लापरवाही हुई या व्यवस्था में कोई बड़ी खामी रही।