अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा और दान की कथित चोरी के मामले में जांच तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश सरकार और विशेष जांच दल (SIT) अब आरोपियों से कथित गबन की गई रकम की पूरी रिकवरी की तैयारी में जुटे हैं। जांच एजेंसियों का फोकस सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चोरी गई रकम की भरपाई भी कराई जाएगी। इसके लिए नकदी, चल-अचल संपत्तियों और सोना-चांदी सहित अन्य संपत्तियों का आकलन किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
8 गिरफ्तारियां, कई और लोग जांच के घेरे में
अब तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं और उनसे भी पूछताछ की जा चुकी है। इस बीच एसआईटी का कार्यकाल 15 दिन के लिए और बढ़ा दिया गया है ताकि जांच को अंतिम रूप दिया जा सके। सूत्रों के मुताबिक, पांच अन्य गणनाकर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। उनसे पूछताछ जारी है और यदि पर्याप्त साक्ष्य मिले तो आगे गिरफ्तारी की कार्रवाई भी की जा सकती है।
पैसा नहीं मिला तो संपत्तियों से होगी भरपाई
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित तौर पर गबन की गई रकम कहां खर्च हुई और उससे कौन-कौन सी संपत्तियां बनाई गईं। यदि चोरी की पूरी रकम नकद के रूप में बरामद नहीं होती है तो आरोपियों की संपत्तियों से उसकी भरपाई की जा सकती है। पुलिस यह भी जांच रही है कि मंदिर से जुड़े रहने के दौरान किन लोगों की संपत्ति में असामान्य बढ़ोतरी हुई। साथ ही मंदिर के चढ़ावे में मिले सोना-चांदी का भी हिसाब खंगाला जा रहा है। जहां जरूरत होगी, वहां छापेमारी कर बरामदगी की कार्रवाई भी की जाएगी।
BNSS की धारा के तहत होगी कार्रवाई
इस मामले में जांच एजेंसियां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, अपराध से अर्जित संपत्तियों की जब्ती और उनसे नुकसान की भरपाई का कानूनी प्रावधान मौजूद है। पहले इस तरह की कार्रवाई गैंगस्टर एक्ट के तहत की जाती थी, जिसमें लंबी प्रक्रिया लगती थी। अब नए कानूनी प्रावधानों के तहत प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि अंतिम कार्रवाई अदालत और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर ही होगी।
50 से ज्यादा लोगों से पूछताछ, सुरक्षा व्यवस्था भी जांच के दायरे में
एसआईटी अब तक 50 से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है। इसमें गिरफ्तार आरोपी, बैंक कर्मचारी, गणनाकर्मी और निजी सुरक्षा कर्मी भी शामिल हैं। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि गणना कक्ष में लंबे समय तक एक ही कर्मचारियों की तैनाती क्यों रही और क्या इसी वजह से कथित अनियमितताओं को बढ़ावा मिला। इसके अलावा कंट्रोल रूम और सीसीटीवी निगरानी से जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई।
इसे भी पढ़ें : इंग्लैंड में भी छाए Vaibhav Suryavanshi, 15 साल के बल्लेबाज को बताया 'कुदरत का करिश्मा'
जांच पूरी होने के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
फिलहाल पूरा मामला एसआईटी की जांच के अधीन है और अंतिम निष्कर्ष अभी सामने आना बाकी है। जांच एजेंसियां कथित चोरी की वास्तविक राशि, उससे खरीदी गई संपत्तियों और इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका का आकलन कर रही हैं। यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं तो कानून के अनुसार आरोपियों से नगदी, संपत्ति और अन्य परिसंपत्तियों के माध्यम से रिकवरी की जा सकती है। वहीं जिन लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई जाएगी, उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।