
देशभर में विख्यात जगद्गुरु रामभद्राचार्य के एक बयान ने पूरे संत समाज में भूचाल ला दिया है क्योंकि जिस प्रेमानंद महाराज जी के दरबार में दुनियाभर के जानें मानें लोग आते हैं, उनको रामभद्राचार्य ने चैलेंज दे दिया है, जिसको लेकर सोशल मीडिया से लेकर संत समाज में भी तकरार छिड़ गई है, कई भक्तों का भयंकर गुस्सा फूट पड़ा है, दरअसल हाल ही में वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज को लेकर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि वो उन्हें किसी भी तरह का चमत्कार नहीं मानते. यही नहीं, उन्होंने खुली चुनौती देते हुए कहा कि प्रेमानंद महाराज अगर सच में चमत्कारी हैं तो संस्कृत का एक अक्षर बोलकर दिखा दें. रामभद्राचार्य ने यहां तक कह दिया कि प्रेमानंद महाराज विद्वान भी नहीं हैं और उन्हें वो अपने बालक के समान मानते हैं. उनके इस बयान से प्रेमानंद महाराज के भक्तों में जबरदस्त गुस्सा फूट पड़ा है.
फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर पर भड़के लोग
जगद्गुरु के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रेमानंद जी के अनुयायियों ने इसे अपने गुरु का अपमान बताया. हजारों की संख्या में लोग फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर पर लिखने लगे कि उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. कई भक्तों ने ये तक कह दिया कि किसी संत को इस तरह से चैलेंज करना मर्यादा के खिलाफ है. वहीं, कुछ यूजर्स ने टिप्पणी करते हुए लिखा कि ऐसे ज्ञान का क्या फायदा, जिससे घमंड झलकने लगे. भक्तों का कहना है कि प्रेमानंद महाराज युवाओं को नशे से दूर करने और भक्ति की राह पर लाने का काम कर रहे हैं, ऐसे में उन्हें इस तरह ललकारना बेहद अनुचित है. सोशल मीडिया पर ये मुद्दा अब संत समाज की गरिमा से जोड़कर देखा जा रहा है.
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अब संत समाज भी खुलकर सामने आया
जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बयान पर अब संत समाज भी खुलकर सामने आ गया है. सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी के देवेशाचार्य महाराज ने कहा कि रामभद्राचार्य स्वयं पूजनीय संत हैं, लेकिन उनसे ऐसी भाषा की उम्मीद नहीं की जा सकती. संत समाज से हमेशा संयम और मर्यादित व्यवहार की अपेक्षा की जाती है. वहीं, सीताराम दास महाराज ने इसे संकीर्ण मानसिकता का परिचायक बताया और कहा कि प्रेमानंद महाराज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बने हैं. उनका मानना है कि संतों का कर्तव्य समाज को जोड़ना है, न कि विवाद पैदा करना. यही नहीं, उज्जैन अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रामेश्वर दास ने भी बयान को सनातन धर्म की गरिमा के खिलाफ बताया और संत समाज से अपील की कि वो एकता और शांति का संदेश दें, न कि आपसी विवाद.
हनुमानगढ़ी मंदिर के महंत ने उठाई मांग
वहीं हनुमानगढ़ी मंदिर के महंत राजू दास और महंत विशाल दास महाराज ने भी अपनी राय रखते हुए कहा कि रामभद्राचार्य और प्रेमानंद महाराज दोनों ही समाज में पूजनीय हैं. ऐसे बयानों से संत समाज में फूट पड़ सकती है और आम लोगों के मन में भी भ्रम पैदा होगा. उनका सुझाव है कि इस तरह की बातों को सार्वजनिक मंच पर कहने के बजाय दोनों संतों को आपस में बैठकर विवाद को खत्म करना चाहिए. अगर मतभेद हैं तो उन्हें सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाना ही बेहतर होगा. संत समाज का मानना है कि दोनों संतों का उद्देश्य समाज में धार्मिक चेतना फैलाना है, न कि एक-दूसरे को चुनौती देना.
जगद्गुरु के बयान पर भक्तों ने उठाए सवाल
जगद्गुरु के बयान को लेकर भक्तों ने सवाल उठाए हैं कि क्या संत समाज का यही धर्म है कि वे एक-दूसरे की निंदा करें? प्रेमानंद जी के भक्तों का कहना है कि डायलिसिस के बावजूद महाराज भक्तों को आशीर्वाद और मार्गदर्शन देते हैं, जो अपने आप में चमत्कार से कम नहीं. एक यूजर ने लिखा अगर किसी को संस्कृत आती है तो क्या वही संत कहलाएगा? भक्ति का मापदंड सिर्फ विद्वता नहीं, बल्कि श्रद्धा और सेवा भाव भी है. भक्तों का आरोप है कि जगद्गुरु का बयान युवाओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है और इससे सनातन धर्म की एकजुटता कमजोर हो सकती है. अब सवाल ये है कि क्या यह विवाद यहीं खत्म होगा या और बढ़ेगा. फिलहाल ये विवाद थमता नजर नहीं आ रहा, क्योंकि प्रेमानंद महाराज के भक्तों ने सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया है और जगद्गुरु से माफी की मांग भी उठने लगी है.