
Rare pregnancy happened: मेरठ में एक चौंकाने वाला और दुर्लभ मेडिकल केस सामने आया है, जिसमें एक 30 वर्षीय महिला ने गर्भाशय की जगह लिवर के दाहिने हिस्से में गर्भधारण किया है. महिला मूल रूप से बुलंदशहर की रहने वाली है और उसके पहले से दो बच्चे हैं. दो महीने से पेट दर्द और उल्टी की शिकायत के बाद जब एमआरआई जांच कराई गई, तो हैरान करने वाला तथ्य सामने आया. रेडियोलॉजिस्ट डॉ. केके गुप्ता ने जांच में पाया कि भ्रूण लिवर में विकसित हो रहा है और उसमें कार्डियक पल्सेशन यानी धड़कन भी दर्ज की गई.
इंट्राहेप्टिक एक्टोपिक प्रेग्नेंसी: 0.03% की दुर्लभता
डॉ. गुप्ता ने बताया कि यह स्थिति "इंट्राहेप्टिक एक्टोपिक प्रेग्नेंसी" कहलाती है, जो कि मेडिकल इतिहास में अत्यंत दुर्लभ है. उन्होंने कहा कि सभी एक्टोपिक प्रेग्नेंसी मामलों में ऐसी स्थिति केवल 0.03% मामलों में देखने को मिलती है. गर्भाशय के बाहर भ्रूण का विकास मां और बच्चे दोनों के लिए जानलेवा हो सकता है. ऐसे मामलों में गर्भपात या सर्जरी ही एकमात्र विकल्प होता है. यदि सर्जरी की जाती है तो इसमें लिवर का कुछ हिस्सा भी हटाना पड़ सकता है, ताकि महिला की जान बचाई जा सके.
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देश का पहला मामला, AIIMS में होगा इलाज
डॉ. गुप्ता का दावा है कि देश में पहले कभी ऐसा कोई केस सामने नहीं आया है, जिससे यह केस भारत का पहला माना जा सकता है. आईएमए की पूर्व सचिव डॉ. मनीष त्यागी ने भी इस बात की पुष्टि की है कि उनके सामने भी ऐसा कोई मामला पहले नहीं आया. महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए अब उसे इलाज के लिए दिल्ली के एम्स भेजा जा रहा है, जहां विशेषज्ञों की टीम उसकी सर्जरी करेगी. मेडिकल जगत के लिए यह केस एक चुनौती के साथ-साथ शोध का विषय भी बन गया है.