भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने आम लोगों को बड़ी राहत देते हुए रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला किया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका सीधा मतलब है कि होम लोन, कार लोन या अन्य कर्ज लेने वालों की EMI फिलहाल नहीं बढ़ेगी, जिससे उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत मिलेगी।
महंगाई नियंत्रण में, लेकिन जोखिम बरकरार
आरबीआई ने माना कि फिलहाल महंगाई नियंत्रण में है और आर्थिक स्थिति संतुलित बनी हुई है। हालांकि खाद्य पदार्थों की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी चिंता का विषय बनी हुई है। MPC के अनुसार, आने वाले समय में महंगाई पर “अपसाइड रिस्क” यानी बढ़ने का खतरा बना हुआ है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए औसत मुद्रास्फीति 4.6% रहने का अनुमान जताया गया है, जो लक्ष्य के आसपास ही है।
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ग्रोथ अनुमान में हल्की कटौती
केंद्रीय बैंक ने आर्थिक विकास को लेकर सतर्क रुख अपनाते हुए FY26 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 7.6% से घटाकर 7.3% कर दिया है। यह संशोधन वैश्विक हालात और भू-राजनीतिक तनावों को ध्यान में रखकर किया गया है। हालांकि, आरबीआई का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत स्थिति में है और चुनौतियों के बावजूद आगे बढ़ने की क्षमता रखती है।
वैश्विक तनाव बना चुनौती
मौद्रिक नीति बैठक में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर भी चिंता जताई गई। आरबीआई के मुताबिक, अगर यह तनाव लंबा खिंचता है तो कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे महंगाई बढ़ने और विकास दर पर असर पड़ने का खतरा है। ऐसे में RBI फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाते हुए स्थिति पर नजर बनाए हुए है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कदम उठाए जा सकें।