भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की तीन दिवसीय बैठक बुधवार से शुरू हो गई है। इस बैठक के नतीजों का ऐलान 5 जून को RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा करेंगे। देशभर के करोड़ों होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन धारकों की नजर इस फैसले पर टिकी हुई है क्योंकि इससे सीधे उनकी EMI प्रभावित हो सकती है।
रेपो रेट में बदलाव की उम्मीद कम
अधिकांश अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि RBI फिलहाल रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही बनाए रख सकता है। हाल के महीनों में केंद्रीय बैंक पहले ही ब्याज दरों में कटौती कर चुका है। ऐसे में अब RBI महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक हालात को देखते हुए कोई बड़ा कदम उठाने से पहले इंतजार कर सकता है।
EMI पर क्या होगा असर?
अगर RBI रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करता है तो होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज की EMI में भी फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा। यानी जिन लोगों को ब्याज दरों में कटौती के जरिए राहत मिलने की उम्मीद थी, उन्हें अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं अगर भविष्य में दरें बढ़ती हैं तो EMI का बोझ भी बढ़ सकता है।
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महंगाई बनी सबसे बड़ी चिंता
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने RBI की चिंता बढ़ा दी है। तेल महंगा होने से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ती है, जिसका असर रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर पड़ता है। यही वजह है कि केंद्रीय बैंक महंगाई के जोखिम को लेकर सतर्क नजर आ रहा है।
रेपो रेट और आम आदमी का कनेक्शन
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। जब यह दर बढ़ती है तो बैंकों के लिए पैसा महंगा हो जाता है और वे ग्राहकों के लोन पर ब्याज बढ़ा देते हैं। इसके उलट रेपो रेट घटने पर लोन सस्ते हो सकते हैं और EMI कम हो सकती है। इसलिए हर पॉलिसी बैठक का असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ता है।
5 जून पर टिकी निगाहें
फिलहाल बाजार को 5 जून का इंतजार है, जब RBI अपनी नई मौद्रिक नीति का ऐलान करेगा। रेपो रेट में बदलाव हो या न हो, लेकिन महंगाई, आर्थिक विकास, रुपये की स्थिति और भविष्य की ब्याज दरों को लेकर RBI के संकेत आने वाले महीनों की आर्थिक दिशा तय कर सकते हैं।