मौद्रिक नीति समिति (MPC) की शुक्रवार को बैठक होनी है. वहीं इस बैठक से पहले ऐसा माहौल तैयार हो गया है मानो बाजार में उम्मीदों की बारिश होने वाली हो. दरअसल इस बार अर्थव्यवस्था से जुड़ी कई बड़ी रिपोर्टों और आंकड़ों ने RBI को मजबूती से अपना रुख बदलने का इशारा दे दिया है. जिसके चलते अब जहां ग्रोथ को लेकर उम्मीदें और भी अधिक बढ़ गई हैं, वहीं महंगाई पर काबू पाने की संभावनाओं में भी मजबूती आई है.
मैक्रोइकोनॉमिक प्रोजेक्शंस में RBI कर सकता है बड़ा बदलाव
मार्केट एक्सपर्ट्स की मानें तो RBI अपने मैक्रोइकोनॉमिक प्रोजेक्शंस में बड़ा बदलाव कर सकता है. इसको लेकर तकरीबन सभी अर्थशास्त्रियों की सहमति है कि केंद्रीय बैंक FY26 के लिए ग्रोथ अनुमान बढ़ा सकता है और महंगाई प्रोजेक्शन को कम कर सकता है. सितंबर तिमाही में GDP ग्रोथ अनुमान से ज्यादा मजबूत रही और महंगाई में भी तेजी से नरमी दिखाई दी. जिसके कारण विश्लेषकों को ऐसी उम्मीद है कि RBI महंगाई अनुमान को 2.6% से घटाकर लगभग 1.8-2% कर सकता है. जबकि ग्रोथ अनुमान 6.8% से बढ़ाकर 7% से ऊपर ले जाया जा सकता है.
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लगातार महंगाई का अनुमान कम कर रहा RBI
पिछले कुछ महीनों में RBI लगातार महंगाई का अनुमान कम करता जा रहा है. जहां फरवरी में FY26 की महंगाई 4.2% बताई गई, वहीं अक्टूबर में इसे घटाकर 2.6% किया गया और अब इसे और नीचे लाने की तैयारी चल रही है. RBI की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता का कहना है कि भारत में महंगाई का अनुमान लगाना मुश्किल है क्योंकि CPI में खाद्य पदार्थों का वजन ज्यादा है और उनकी कीमतें बेहद अस्थिर होती हैं.
नवंबर और दिसंबर में भी CPI 1% से नीचे-एक्सपर्ट्स
CPI महंगाई अक्टूबर में 0.25% रही, जो कि वर्तमान सीरीज में सबसे कम है. इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं, पहला सब्जियों की कीमतों में 9 महीने से लगातार गिरावट और दूसरा GST में कटौती से कई रोजमर्रा की चीजों के दाम नीचे आना. एक्सपर्ट्स की मानें तो नवंबर और दिसंबर में भी CPI 1% से नीचे रह सकती है, जिससे RBI के अनुमान और भी नीचे जा सकता है.
निर्यात और टैरिफ दबाव अभी भी ग्रोथ के सामने चुनौती
अर्थशास्त्रियों को इस बात की उम्मीद है कि Q2 में GST कटौती के बाद मांग में जो उछाल आया, उसका असर Q3 में भी नजर आएगा. क्रेडिट ग्रोथ में मजबूती, टैक्स कलेक्शन में तेजी, नॉन-ऑयल-नॉन-गोल्ड इम्पोर्ट्स में उछाल और ऑटो सेल्स में बढ़त इन सभी संकेतों से आर्थिक गतिविधियां बेहतर होती दिखाई दे रही हैं. हालांकि निर्यात और टैरिफ दबाव अभी भी ग्रोथ के सामने चुनौती बनकर खड़े हैं.