डिजिटल बैंकिंग और यूपीआई का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों के लिए राहत भरी खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक ने छोटे ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में ग्राहकों को सुरक्षा देने के लिए नया प्रावधान लागू करने की तैयारी की है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, 1 जनवरी 2027 से नया ढांचा लागू होने का लक्ष्य है। इसके तहत तय शर्तों के अनुसार पात्र ग्राहकों को 5,000 रुपये तक का मुआवजा मिल सकेगा।
कब मिलेगा मुआवजा?
आरबीआई के अनुसार, यह सुविधा छोटे डिजिटल फ्रॉड के मामलों के लिए होगी। गवर्नर ने बताया कि यदि किसी ग्राहक के साथ अनजाने में छोटा ऑनलाइन फ्रॉड होता है और वह तय नियमों के दायरे में आता है, तो उसे 5,000 रुपये तक का मुआवजा दिया जा सकता है। यह व्यवस्था डिजिटल भुगतान पर लोगों का भरोसा बनाए रखने के उद्देश्य से लाई जा रही है।
तीन स्तर पर काम करेगा आरबीआई
ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने के लिए आरबीआई ने तीन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान देने की बात कही है। पहला, बैंकों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाना ताकि फ्रॉड होने की संभावना कम हो। दूसरा, जोखिम की पहले से पहचान कर तुरंत कार्रवाई करने वाली सक्रिय व्यवस्था विकसित करना। तीसरा, लोगों को जागरूक बनाकर साइबर ठगी से बचाना।
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जागरूकता अभियान भी होगा तेज
आरबीआई ने कहा है कि गांवों से लेकर शहरों तक डिजिटल भुगतान जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से लोगों को फर्जी कॉल, लिंक और संदेशों से सावधान रहने की जानकारी दी जाएगी। खास तौर पर वरिष्ठ नागरिकों और नए डिजिटल उपयोगकर्ताओं को जागरूक करने पर जोर रहेगा।
ध्यान रखें जरूरी बात
5,000 रुपये तक का मुआवजा हर फ्रॉड के मामले में अपने आप नहीं मिलेगा। इसके लिए आरबीआई के नियम, पात्रता और बैंक की निर्धारित प्रक्रिया लागू होगी। इसलिए किसी भी संदिग्ध लेनदेन की जानकारी तुरंत बैंक को देना और समय पर शिकायत दर्ज कराना बेहद जरूरी होगा।
2027 से लागू करने की तैयारी
आरबीआई गवर्नर के मुताबिक, यह नया प्रावधान 1 जनवरी 2027 से लागू करने की योजना है। इसके लागू होने के बाद डिजिटल भुगतान करने वाले ग्राहकों को अतिरिक्त सुरक्षा मिलेगी और ऑनलाइन बैंकिंग तथा यूपीआई जैसे प्लेटफॉर्म पर भरोसा और मजबूत होने की उम्मीद है।