अगर आपने कभी बैंकिंग ऐप पर छिपे हुए शुल्क या बार-बार आने वाले ऑफर नोटिफिकेशन से परेशानी झेली है, तो अब राहत मिल सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक ने डिजिटल बैंकिंग को ज्यादा साफ और पारदर्शी बनाने के लिए बैंकों को सख्त निर्देश दिए हैं। नए ड्राफ्ट नियमों के तहत बैंकों को अपनी वेबसाइट और मोबाइल ऐप से भ्रामक तरीके हटाने होंगे।
क्या कहा है आरबीआई ने
केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि जुलाई 2026 तक सभी बैंक अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म से डार्क पैटर्न हटाएं। ये वे डिजाइन तरीके होते हैं जो ग्राहकों को बिना पूरी जानकारी दिए किसी सेवा या उत्पाद को चुनने के लिए प्रेरित करते हैं। अब किसी भी वित्तीय उत्पाद को बेचने से पहले ग्राहक की साफ और स्पष्ट सहमति लेना जरूरी होगा।
क्या होते हैं डार्क पैटर्न
डार्क पैटर्न ऐसे डिजिटल तरीके हैं जिनसे यूजर को भ्रमित किया जाता है। जैसे चेकआउट के आखिर में अचानक शुल्क जोड़ देना, या अतिरिक्त सेवा लेने के लिए बार-बार पॉप-अप दिखाना। कई बार ग्राहक पूरी शर्तें पढ़े बिना ही सहमति दे देते हैं। आरबीआई का कहना है कि अब ऐसी चालाकियों पर रोक लगेगी।
ये भी पढ़ें : 38 मिनट में Noida से Gurugram! नमो भारत का नया कॉरिडोर NCR की दूरी घटाएगा, ट्रैफिक को देगा बड़ा झटका
सर्वे में सामने आई सच्चाई
हाल ही में हुए एक बड़े सर्वे में हजारों लोगों ने बताया कि बैंकिंग ऐप पर छिपे शुल्क और परेशान करने वाले नोटिफिकेशन आम बात हैं। कई यूजर्स ने कहा कि असली शुल्क का पता आखिर में चलता है। इसी तरह के अनुभवों के बाद केंद्रीय बैंक ने यह कदम उठाया है।
बैंकों के लिए साफ निर्देश
नए नियमों के अनुसार, बिना ग्राहक की अनुमति किसी उत्पाद को जबरन जोड़ना या साथ में बेचना बंद करना होगा। हर शुल्क और शर्त साफ शब्दों में पहले ही बतानी होगी। बैंकों को अपने सिस्टम में बदलाव कर पारदर्शिता बढ़ानी होगी। डिजिटल बैंकिंग को भरोसेमंद बनाना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है।
जुलाई 2026 तक समय
बैंकों को इन बदलावों के लिए जुलाई 2026 तक का समय दिया गया है। मोबाइल बैंकिंग के बढ़ते उपयोग को देखते हुए यह फैसला अहम माना जा रहा है। अगर नियम सख्ती से लागू हुए तो ग्राहकों को साफ और निष्पक्ष सेवा मिल सकेगी। अब देखना होगा कि बैंक इस दिशा में कितनी तेजी से कदम उठाते हैं।