भारतीय रिजर्व बैंक ने सरकार के लिए बड़ी घोषणा करते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 2.87 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड सरप्लस ट्रांसफर का ऐलान किया है। इसे आम भाषा में केंद्रीय बैंक का डिविडेंड भी कहा जाता है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब वैश्विक आर्थिक दबाव और बढ़ती ऊर्जा कीमतों ने सरकार के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
पिछले साल से भी ज्यादा राशि
यह रकम पिछले साल के मुकाबले ज्यादा बताई जा रही है। इससे पहले आरबीआई ने 2.69 लाख करोड़ रुपये का सरप्लस ट्रांसफर किया था। अर्थशास्त्रियों का अनुमान पहले से ही 2.7 लाख करोड़ से 3 लाख करोड़ रुपये के बीच लगाया जा रहा था। अब घोषित राशि ने उन अनुमानों को लगभग सही साबित कर दिया है।
सरकार को मिलेगा बड़ा सहारा
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह राशि सरकार के लिए एक मजबूत आर्थिक सहारा साबित हो सकती है। खासकर ऐसे समय में जब कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक तनाव आर्थिक दबाव बढ़ा रहे हैं। इससे सरकार को अपने खर्च और वित्तीय संतुलन को संभालने में मदद मिल सकती है।
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कहां से हुई इतनी कमाई?
आरबीआई को यह आय विदेशी मुद्रा भंडार, घरेलू निवेश और नोट जारी करने से मिलने वाली कमाई से होती है। इसके अलावा विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप और निवेश से मिलने वाले लाभ ने भी इस बार बड़ी भूमिका निभाई है। सोने की कीमतों में तेजी और डॉलर की स्थिति में बदलाव का भी असर देखने को मिला।
बैलेंस शीट में आया बड़ा उछाल
रिपोर्ट के अनुसार आरबीआई की बैलेंस शीट में भी बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। केंद्रीय बैंक की कुल बैलेंस शीट बढ़कर लगभग 91 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गई। विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकिंग व्यवस्था में नकदी बढ़ाने के लिए किए गए कई कदमों ने इसमें योगदान दिया है।
आर्थिक तस्वीर पर रहेगी नजर
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह रकम आर्थिक चुनौतियों को पूरी तरह खत्म नहीं करेगी, लेकिन इससे सरकार को राहत जरूर मिलेगी। आने वाले समय में तेल की कीमतें, वैश्विक हालात और विदेशी निवेश की स्थिति भारत की आर्थिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।