Voting in Bengal-Tamil Nadu: पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में इस बार रिकॉर्ड तोड़ मतदान ने सबका ध्यान खींचा है। पहले चरण में पश्चिम बंगाल की 152 सीटों और तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर भारी मतदान दर्ज किया गया। रात 10 बजे तक बंगाल में 92.66% और तमिलनाडु में 85.14% वोटिंग हुई, जो पिछले चुनावों के मुकाबले काफी ज्यादा है।
क्या है SIR और क्यों अहम
SIR यानी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण, जिसमें फर्जी, मृत या स्थान बदल चुके मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं और नए योग्य वोटरों को जोड़ा जाता है। चुनाव आयोग का लक्ष्य साफ और सटीक वोटर लिस्ट तैयार करना है, जिससे वास्तविक मतदाता ही मतदान करें।
बिहार में दिख चुका है असर
SIR का असर पहले बिहार के चुनावों में देखने को मिला था। वहां लाखों अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाए गए और नए मतदाता जोड़े गए। इसके बाद वोटिंग प्रतिशत में लगभग 10% की बढ़ोतरी दर्ज हुई, जिससे चुनावी नतीजों पर भी बड़ा असर पड़ा।
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बदला समीकरण
पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान करीब 91 लाख नाम हटाए गए, जबकि तमिलनाडु में लगभग 70 लाख मतदाताओं के नाम सूची से बाहर किए गए। इससे कुल मतदाताओं की संख्या कम हुई, लेकिन मतदान प्रतिशत में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब केवल वास्तविक मतदाता सूची में रहते हैं, तो मतदान का प्रतिशत बढ़ना स्वाभाविक है।
नतीजों पर सबकी नजर
इतनी बड़ी संख्या में मतदान के बाद अब सभी की नजर चुनाव परिणामों पर है। क्या यह बंपर वोटिंग सत्ता परिवर्तन लाएगी या मौजूदा सरकारों को मजबूत करेगी, इसका जवाब आने वाले नतीजों में मिलेगा। फिलहाल इतना तय है कि SIR ने चुनावी गणित को जरूर प्रभावित किया है।