भारत की सबसे बड़ी निजी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज एक बार फिर वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने की तैयारी में है। इसके लिए कंपनी ने सीधे अमेरिका से मंजूरी मांगनी शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रिलायंस चाहती है कि पश्चिमी दबाव और टैरिफ के बीच उसकी तेल आपूर्ति प्रभावित न हो। इसी वजह से कंपनी रूसी तेल पर निर्भरता कम करने के विकल्प तलाश रही है और वेनेजुएला का तेल इस रणनीति का अहम हिस्सा बनकर उभरा है।
अमेरिका से क्यों जरूरी है इजाजत
वेनेजुएला पर लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंध लगे हुए हैं। ऐसे में वहां से तेल खरीदने के लिए अमेरिका की अनुमति जरूरी होती है। सूत्रों के अनुसार रिलायंस के अधिकारी अमेरिकी विदेश विभाग और ट्रेजरी विभाग के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं। कंपनी यह साफ करना चाहती है कि वह सभी अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करते हुए ही तेल आयात करेगी, ताकि भविष्य में किसी तरह की रुकावट न आए।
ट्रंप के बयान से बढ़ी हलचल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद इस पूरे मामले में तेजी आई है। ट्रंप ने कहा है कि वेनेजुएला की अंतरिम सरकार 30 से 50 मिलियन बैरल तेल निकालकर अमेरिका भेजेगी और फिर उसे बाजार भाव पर बेचा जाएगा। इसी संकेत के बाद वैश्विक तेल कंपनियों को उम्मीद जगी है कि वेनेजुएला का तेल दोबारा अंतरराष्ट्रीय बाजार में आ सकता है।
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पहले भी मिल चुका है लाइसेंस
यह पहली बार नहीं है जब रिलायंस को वेनेजुएला से तेल आयात करने की इजाजत मिली हो। पिछले साल अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच रिलायंस को गुजरात के जामनगर स्थित रिफाइनरी के लिए विशेष लाइसेंस दिया गया था। वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी पीडीवीएसए के रिकॉर्ड बताते हैं कि 2025 की शुरुआत में रिलायंस को करीब 63 हजार बैरल प्रतिदिन तेल की आपूर्ति की गई थी। हालांकि मई 2025 के बाद यह सप्लाई रुक गई।
अमेरिकी सख्ती और बढ़ा दबाव
मार्च और अप्रैल के बीच अमेरिका ने पीडीवीएसए से जुड़े कई बिजनेस पार्टनर्स के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए। इसके साथ ही वेनेजुएला से तेल खरीदने वालों को टैरिफ की चेतावनी भी दी गई। इसका असर यह हुआ कि कई कंपनियों को पीछे हटना पड़ा। रिलायंस भी इसी दबाव में वैकल्पिक रास्ते तलाश रही है, ताकि भविष्य में उसकी रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित न हो।
वैश्विक कंपनियों की दौड़
रिलायंस अकेली कंपनी नहीं है जो वेनेजुएला के तेल पर नजर लगाए हुए है। शेवरॉन, विटोल और ट्राफिगुरा जैसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भी लाइसेंस पाने की कोशिश में हैं। बताया जा रहा है कि वेनेजुएला में अभी भी लाखों बैरल कच्चा तेल टैंकों और जहाजों में फंसा हुआ है। अगर अमेरिका से हरी झंडी मिलती है, तो भारत के लिए यह तेल आपूर्ति के लिहाज से एक बड़ी राहत साबित हो सकता है।