Reliance Share Fall : रिलायंस इंडस्ट्रीज के निवेशकों के लिए 2026 अब तक उतार-चढ़ाव भरा रहा है। कंपनी के शेयर में इस साल करीब 21 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिससे बाजार पूंजीकरण में लगभग 4 लाख करोड़ रुपये की कमी हुई है। कंपनी का प्रदर्शन इस दौरान Nifty 50 से भी कमजोर रहा, जो साल में करीब 11 प्रतिशत नीचे है। गिरावट के बीच निवेशकों की नजर अब उन कारणों पर है, जिनसे शेयर पर दबाव बना हुआ है।
विंडफॉल टैक्स से बढ़ा दबाव
रिलायंस के शेयर में मार्च के दौरान दबाव बढ़ा, जब सरकार ने डीजल और एटीएफ निर्यात पर विंडफॉल टैक्स दोबारा लागू किया। कंपनी की जामनगर रिफाइनरियां बड़े पैमाने पर डीजल और विमान ईंधन का उत्पादन करती हैं और इनका एक हिस्सा निर्यात किया जाता है। ऐसे में निर्यात से जुड़े कर में बदलाव का असर कंपनी के ऊर्जा कारोबार और निवेशकों की धारणा पर पड़ा।
पश्चिम एशिया संकट ने बढ़ाई मुश्किल
विश्लेषकों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी घटनाक्रम का असर रिलायंस के ऑयल-टु-केमिकल कारोबार पर पड़ा है। कच्चे तेल के प्रीमियम, माल ढुलाई की बढ़ी लागत और ईंधन खुदरा कारोबार में कम वसूली ने मजबूत रिफाइनिंग मार्जिन से मिलने वाले फायदे को कुछ हद तक कम किया है। ऐसे में शेयर पर निकट अवधि की कमाई और मूल्यांकन को लेकर दबाव बना हुआ है।
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Jio IPO पर भी निवेशकों की नजर
रिलायंस के शेयर के लिए Jio की प्रस्तावित लिस्टिंग भी अहम मुद्दा बनी हुई है। एंजल वन के विश्लेषक वकारजावेद खान के मुताबिक, निवेशकों को चिंता है कि अगर Jio का IPO नए शेयर जारी करने के रूप में आता है तो रिलायंस के शेयर में मौजूद होल्डिंग कंपनी की छूट और बढ़ सकती है। हालांकि, Jio और Retail मिलकर रिलायंस के EBITDA में आधे से अधिक योगदान दे रहे हैं और जून तिमाही का प्रदर्शन उम्मीदों से बेहतर रहा था।
तकनीकी संकेतों में कमजोरी जारी
SBI Securities के तकनीकी विश्लेषक सुदीप शाह के अनुसार, रिलायंस के शेयर के तकनीकी संकेत फिलहाल कमजोर हैं। शेयर का RSI 40 से नीचे चला गया है और यह प्रमुख मूविंग एवरेज से नीचे कारोबार कर रहा है। उनके अनुसार, 1,275-1,280 रुपये का स्तर तत्काल प्रतिरोध क्षेत्र हो सकता है। जब तक शेयर इस स्तर से नीचे रहता है, तकनीकी तस्वीर में कमजोरी बनी रहने की बात कही गई है।
गिरावट के बाद निवेशकों की नजर आगे
रिलायंस के शेयर में गिरावट के बावजूद कंपनी के अलग-अलग कारोबार और आने वाले घटनाक्रम निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। विश्लेषकों की नजर Jio IPO की कीमत, आगे होने वाली टैरिफ बढ़ोतरी, रिफाइनिंग मार्जिन और न्यू एनर्जी कारोबार की प्रगति पर है। 21 सितंबर को शेयर करीब 1,244 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि 52 सप्ताह का दायरा करीब 1,226 से 1,612 रुपये रहा है। ऐसे में आगे के कारोबारी संकेतों और कंपनी से जुड़े घटनाक्रम पर बाजार की नजर बनी रहेगी।