देश की सबसे मूल्यवान कंपनी Reliance Industries के शेयरों में आज अचानक भारी गिरावट देखने को मिली। बीएसई पर रिलायंस का शेयर 4 प्रतिशत से ज्यादा टूटकर 1497 रुपये तक पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में यह शेयर 1577 रुपये पर बंद हुआ था और आज करीब उसी स्तर पर खुलने के बाद तेज बिकवाली के दबाव में आ गया। ट्रेडिंग के दौरान वॉल्यूम भी सामान्य से कहीं ज्यादा रहा, जिससे साफ हो गया कि निवेशकों में बेचैनी बढ़ी हुई है।
रूस के तेल को लेकर कंपनी की सफाई
गिरावट की बड़ी वजह रूस से कच्चे तेल को लेकर सामने आई खबरें मानी जा रही हैं। रिलायंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी कर साफ किया कि उसे जनवरी में रूस से कच्चे तेल की कोई डिलीवरी मिलने की उम्मीद नहीं है। कंपनी ने यह भी कहा कि पिछले तीन हफ्तों से उसे रूस से कोई कार्गो नहीं मिला है। रिलायंस ने ब्लूमबर्ग की उस रिपोर्ट का खंडन किया जिसमें दावा किया गया था कि रूस से तेल लेकर आ रहे तीन जहाज जामनगर रिफाइनरी की ओर बढ़ रहे हैं।
अमेरिका से जुड़ी चिंताओं ने बढ़ाया दबाव
यह सफाई ऐसे समय आई है जब अमेरिका के साथ भारत के व्यापारिक रिश्तों को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने बयान दिया है कि अगर भारत रूस से तेल की खरीद कम नहीं करता है तो उस पर टैरिफ बढ़ाया जा सकता है। इस बयान के बाद बाजार में यह डर बढ़ गया कि रिलायंस जैसी कंपनियों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर शेयर की कीमत पर दिखा।
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निफ्टी पर भी पड़ा असर
रिलायंस का शेयर आज निफ्टी 50 इंडेक्स पर गिरावट का तीसरा सबसे बड़ा कारण बना। निफ्टी की कुल 58 अंकों की गिरावट में रिलायंस का योगदान करीब 18.8 अंकों का रहा। इस गिरावट में एचडीएफसी बैंक और इन्फोसिस जैसे बड़े शेयरों की कमजोरी भी शामिल रही। साफ है कि रिलायंस जैसे भारी भरकम स्टॉक में गिरावट का सीधा असर पूरे बाजार पर पड़ता है।
हालिया प्रदर्शन कैसा रहा है
अगर हाल के प्रदर्शन पर नजर डालें तो रिलायंस के शेयर में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। पिछले एक हफ्ते में शेयर करीब आधा प्रतिशत गिरा है जबकि दो हफ्तों में 2.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है। मासिक आधार पर भी यह शेयर हल्का कमजोर रहा है। हालांकि तिमाही आधार पर रिलायंस ने 11 प्रतिशत से ज्यादा की मजबूती दिखाई है और सालाना आधार पर शेयर अब भी करीब 26 प्रतिशत ऊपर है।
तकनीकी संकेत क्या कहते हैं
तकनीकी तौर पर रिलायंस का शेयर अभी मिड और लॉन्ग टर्म के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज से ऊपर बना हुआ है। ट्रेंडलाइन के आंकड़ों के मुताबिक शेयर का आरएसआई करीब 59 के स्तर पर है, जिसे न्यूट्रल माना जाता है। इसका मतलब यह है कि शेयर न तो ज्यादा महंगा है और न ही ज्यादा सस्ता। जानकारों का मानना है कि फिलहाल बाजार रूस के तेल और अमेरिका के रुख पर नजर रखेगा और उसी के आधार पर रिलायंस के शेयर में आगे की दिशा तय होगी।