देश में करोड़ों लोग नौकरी, पढ़ाई या मजबूरी में किराए के घरों में रहते हैं। लेकिन सालों से परेशान करने वाली समस्या एक ही मकान मालिक की मनमर्जी। कभी किराया अचानक बढ़ाना, कभी सिक्योरिटी डिपॉजिट आसमान छूना और कभी बिना वजह घर खाली करने का दबाव। इन्हीं शिकायतों को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने Rent Agreement Rules 2025 लागू कर दिए हैं। यह नियम किराएदारों को मजबूत सुरक्षा देता है और मकान मालिक-किराएदार के रिश्ते को पारदर्शी बनाता है।
किराया बढ़ाने के लिए सख्त नियम
नए नियमों के अनुसार मकान मालिक किराया साल में सिर्फ एक बार बढ़ा सकता है, वह भी तब जब 12 महीने पूरे हो जाएं। इससे पहले 90 दिन का नोटिस देना अनिवार्य है। इसके अलावा घर में कोई खराबी आने पर पहले 30 दिन में मकान मालिक को मरम्मत करवानी होगी। अगर वह ऐसा नहीं करता, तो किराएदार खुद मरम्मत करवा सकता है और राशि किराए से काट सकता है। साथ ही रेंट एग्रीमेंट अब 60 दिनों के भीतर डिजिटल स्टैंप और ऑनलाइन रजिस्टर्ड रूप में उपलब्ध कराना आवश्यक होगा, ताकि भविष्य में विवाद न हो।
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सिक्योरिटी डिपॉजिट पर भी लगेगी लगाम
Rent Rules 2025 का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मकान मालिक अब मनमर्जी की सिक्योरिटी राशि नहीं मांग सकते। रेसिडेंशियल किराए पर दो महीने का किराया ही सिक्योरिटी डिपॉजिट होगा। कमर्शियल के लिए यह सीमा छह महीने तय की गई है। अगर कोई रजिस्ट्रेशन नहीं करवाता या नियमों का उल्लंघन करता है, तो राज्यों के हिसाब से 5,000 से शुरू होने वाले जुर्माने का प्रावधान है। मकान मालिक किराएदार के कमरे में बिना अनुमति नहीं जा सकता। उसे कम से कम 24 घंटे पहले लिखित जानकारी देनी होगी।
किराएदार को निकालना अब आसान नहीं
सबसे बड़ा सुरक्षा कवच यह है कि अब कोई भी मकान मालिक किराएदार को सीधे नहीं निकाल सकता। ऐसा तभी होगा जब Rent Tribunal आदेश देगा। यदि कोई मकान मालिक बिजली-पानी काटता है, धमकाता है या जबरदस्ती घर खाली करवाने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई होगी। सरकार का दावा है कि ये नियम देशभर के किराएदारों को वह सम्मान और सुरक्षा देंगे जिसकी उन्हें सालों से जरूरत थी।