AI technology will facilitate: बिहार में सड़कों की गुणवत्ता सुधारने और बेहतर रखरखाव सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में OPRMC-III योजना को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई। बैठक में सड़कों के संधारण, तकनीकी सुधार और जवाबदेही तय करने पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार का लक्ष्य है कि लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन मिल सके।
OPRMC-III की शुरुआत
OPRMC-II की सफलता के बाद अब OPRMC-III को अगले 7 वर्षों के लिए लागू किया जा रहा है। इसके तहत 100 पैकेजों में कुल 19,327 किलोमीटर सड़कों का रखरखाव किया जाएगा। योजना की औसत लागत लगभग 1.22 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर तय की गई है। पिछले चरण की तुलना में इस बार दायरा और जिम्मेदारी दोनों बढ़ाए गए हैं।
बेहतर जल निकासी
इस योजना के तहत 6 मीटर तक के छोटे पुल-पुलियों का पूरा संधारण किया जाएगा, जबकि बड़े पुलों के लिए केवल अप्रोच रोड का रखरखाव होगा। जल निकासी व्यवस्था को सीमित लेकिन प्रभावी रखा गया है, ताकि सड़कों की उम्र बढ़ाई जा सके और बारिश के मौसम में नुकसान कम हो।
AI तकनीक से निगरानी
सड़कों की खामियों की पहचान के लिए अब AI और मशीन लर्निंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे सर्वेक्षण में मानवीय दखल कम होगा और समस्याओं का समाधान तेजी से हो सकेगा। साथ ही संवेदकों के रिस्पांस टाइम पर भी नजर रखी जाएगी।
लापरवाही पर कार्रवाई
बैठक में यह भी तय हुआ कि लापरवाही बरतने वाले संवेदकों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। इमरजेंसी, वीवीआईपी मूवमेंट और आपदा से जुड़े कार्यों के लिए अलग फंड का प्रावधान रखा गया है। कुल मिलाकर, सरकार सड़कों के रखरखाव में तकनीक, पारदर्शिता और सख्ती तीनों पर जोर दे रही है।