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इंदौर निवासी पीएचडी स्कॉलर और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रोहिणी घावरी ने आज सोशल मीडिया पर सांसद और आज़ाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद पर यौन शोषण और भावनात्मक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए आत्महत्या की धमकी दी। घावरी ने पोस्ट में लिखा कि तीन साल चले रिश्ते में उन्हें धोखा दिया गया और उनकी ज़िंदगी बर्बाद कर दी गई; उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय और पीएम नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए कहा, “आज ही तेरे नाम पर जहर खाऊँगी — मेरी लाश वापस भारत मत लाना।” इसके पहले घावरी ने पुनः राष्ट्रीय महिला आयोग और पीएमओ को पत्र भेजकर न्याय की मांग भी की थी।
घावरी के आरोपों में यह भी दावा किया गया कि चंद्रशेखर ने उन्हें मानसिक और भावनात्मक रूप से प्रताड़ित किया तथा रिश्ते के दौरान कई बार धमकाया। सोशल मीडिया पर जारी क्रमिक पोस्ट में उन्होंने बताया कि बार-बार रो-रोकर उन्हें मजबूर किया गया और बोलचाल में कई बार अपमान सहना पड़ा। इस विवाद ने राजनीतिक हलकों में भी असर डाला है; मामला मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फैल रहा है और दोनों तरफ के समर्थकों में तीखी प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं।
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पुलिस और आयोगों की प्रतिक्रिया अभी सीमित है। घावरी ने पहले भी अपनी शिकायतें दर्ज करवाई थीं तथा राष्ट्रीय महिला आयोग को सूचित किया था। इस बीच, सामाजिक जानकार और कानूनी विशेषज्ञ बताते हैं कि ऐसे मामलों में त्वरित मनोवैज्ञानिक सहायता और कानूनी प्रक्रिया दोनों आवश्यक हैं ताकि किसी भी प्रकार का नुकसान रोका जा सके और आरोपों की निष्पक्ष जांच हो।
आरोपों का राजनीतिक असर
यह विवाद चंद्रशेखर के राजनीतिक जीवन पर सवाल उठाता दिख रहा है और विपक्ष व सरकार के सरगर्म प्रतिक्रियाओं से मामला और तीखा हो सकता है।
आगे की कार्रवाई की जरूरत
घावरी की धमकी के बाद तात्कालिक रूप से उन्हें सहायता उपलब्ध कराना और आरोपों की स्वतंत्र जांच कराना जरूरी है, ताकि पीड़िता की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित हो सके।