Row over voter list: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ मतदाता सूची से जुड़े विवाद को लेकर दाखिल याचिका एक बार फिर चर्चा में है। याचिका में उनके खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई है, जिसे सोनिया गांधी ने पूरी तरह निराधार और राजनीतिक मकसद से प्रेरित बताया है। उनका कहना है कि यह याचिका कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है और इसका उद्देश्य सिर्फ राजनीतिक दबाव बनाना है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 फरवरी को तय की गई है।
अदालत में सोनिया गांधी का पक्ष
सोनिया गांधी की ओर से कोर्ट में दाखिल जवाब में कहा गया है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची और नागरिकता से जुड़े मामलों में आपराधिक अदालत का दखल नहीं बनता। यह विषय या तो चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है या फिर केंद्र सरकार के अधीन होता है। ऐसे में FIR की मांग पूरी तरह गलत आधार पर की गई है।
निचली अदालत का क्या था रुख
इससे पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि शिकायतकर्ता आरोपों के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर पाया। कोर्ट ने यह भी कहा था कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी की जांच का अधिकार केवल चुनाव आयोग को है और कोई आपराधिक अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
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याचिका में लगाए गए आरोप
याचिका में दावा किया गया है कि सोनिया गांधी ने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता हासिल की, लेकिन इसके बावजूद उनका नाम 1980 की नई दिल्ली की मतदाता सूची में दर्ज था। याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया है कि नागरिकता से पहले उनका नाम वोटर लिस्ट में कैसे शामिल किया गया।
अगली सुनवाई पर टिकी नजर
एडवोकेट विकास त्रिपाठी द्वारा दायर रिवीजन याचिका में सितंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें शिकायत खारिज कर दी गई थी। अब 21 फरवरी को राउज एवेन्यू कोर्ट में होने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि मामले में आगे कोई कानूनी कार्रवाई बनती है या नहीं।