RSS UP Punjab Election 2027 : अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। संघ का खास ध्यान उत्तर प्रदेश और पंजाब पर है। दोनों राज्यों में जमीन पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पिछले कुछ महीनों से काम चल रहा है। इसी बीच नवंबर के पहले हफ्ते में इंदौर में संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक होने जा रही है। दो और तीन नवंबर को होने वाली इस बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। इनमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR, पंजाब में नशे की समस्या, देश विरोधी ताकतों और देश में अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ अभियान जैसे विषय शामिल हैं। संघ की इस बैठक को आने वाले चुनावों की तैयारी के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
SIR के मुद्दे पर संघ की क्या राय है?
उत्तर प्रदेश में SIR को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। वहीं, संघ से जुड़े सूत्रों का मानना है कि इस मुद्दे का जमीन पर खास असर नहीं दिखाई दे रहा है और यह आम लोगों की प्राथमिकता वाला मुद्दा नहीं है। संघ के एक नेता के मुताबिक, करीब 13 करोड़ लोगों के नाम कटने की बात कही जा रही है, लेकिन उनके आकलन में लगभग तीन करोड़ लोग ही इससे प्रभावित हुए हैं। बाकी नामों में ऐसे लोग शामिल हैं, जिनकी मौत हो चुकी है या जो अपना पता बदल चुके हैं। संघ का दावा है कि प्रभावित लोगों को मतदाता सूची में दोबारा नाम शामिल कराने का मौका दिया जा रहा है। ये संघ से जुड़े सूत्रों के विचार हैं।
यूपी में बीजेपी की हैट्रिक पर नजर
उत्तर प्रदेश में संघ अपनी संगठनात्मक स्थिति को मजबूत मान रहा है। संघ से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, शताब्दी वर्ष के दौरान राज्य में शाखाओं की संख्या बढ़ाने और जमीन पर संपर्क मजबूत करने पर जोर दिया गया है। राज्य में बीजेपी की सरकार होने को भी संगठन के लिए एक अहम पहलू माना जा रहा है। संघ से जुड़े नेताओं का कहना है कि यदि विपक्ष विधानसभा चुनाव में SIR को बड़ा मुद्दा बनाता है, तो इससे उसे नुकसान हो सकता है। वे बिहार के चुनावी अनुभव का भी हवाला देते हैं। हालांकि, यह संघ से जुड़े लोगों का राजनीतिक आकलन है। आने वाले चुनाव में इसका कितना असर होगा, यह मतदाताओं के रुख पर निर्भर करेगा।
पंजाब में नशे की समस्या पर खास ध्यान
उत्तर प्रदेश के साथ पंजाब भी संघ की प्राथमिकताओं में शामिल है। पंजाब में नशे की बढ़ती समस्या को लेकर संघ खास तौर पर सक्रिय होने की तैयारी कर रहा है। खबर के मुताबिक, राज्य में गैर-सरकारी संगठनों और स्थानीय लोगों के साथ संपर्क बढ़ाया गया है। इंदौर की बैठक में पंजाब में नशे की समस्या और इससे निपटने के प्रयासों पर विस्तार से चर्चा होगी। संघ की कोशिश स्थानीय स्तर पर लोगों से जुड़ने और सामाजिक मुद्दों पर अपनी पहुंच बढ़ाने की है। पंजाब में चुनावी माहौल के बीच नशे का मुद्दा कितना अहम बनता है, इस पर भी राजनीतिक दलों की नजर रहेगी।
देश विरोधी गतिविधियों और विदेशी दखल पर चर्चा
इंदौर में होने वाली बैठक में केवल चुनावी राज्यों की तैयारियों पर ही बात नहीं होगी। संघ के सामने देश के अंदरूनी मामलों में विदेशी दखल और देश में अराजकता फैलाने वाली गतिविधियों जैसे मुद्दे भी चर्चा के लिए रखे गए हैं। इसके अलावा ओटीटी मंचों पर दिखाए जाने वाले कार्यक्रमों और उनकी सामग्री पर भी विचार किया जाएगा। बैठक में इन विषयों पर संगठन की आगे की रणनीति और अभियान को लेकर चर्चा होने की जानकारी है। संघ की यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं।
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दो और तीन नवंबर की बैठक पर टिकी नजरें
इंदौर में दो और तीन नवंबर को होने वाली अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में उत्तर प्रदेश और पंजाब की तैयारियों को लेकर अहम चर्चा होने की संभावना है। उत्तर प्रदेश में संघ का जोर संगठन मजबूत करने और बीजेपी के लिए अनुकूल माहौल बनाने पर बताया जा रहा है। वहीं, पंजाब में नशे की समस्या और स्थानीय लोगों से संपर्क बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। SIR, विदेशी दखल और ओटीटी सामग्री जैसे मुद्दे भी बैठक के एजेंडे में शामिल हैं। अब देखना होगा कि इस बैठक के बाद संघ किन मुद्दों पर अभियान चलाता है और दोनों राज्यों में उसकी रणनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।