अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर भारतीय बाजार पर साफ दिख रहा है। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन रुपया 27 पैसे टूटकर 90.95 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 90.94 पर खुला और थोड़ी ही देर में 90.95 तक फिसल गया। पिछले कारोबारी सत्र में यह 90.68 पर बंद हुआ था। यानी एक दिन में ही रुपये ने काफी कमजोरी दिखाई।
मजबूत डॉलर बना बड़ी वजह
डॉलर इंडेक्स, जो अमेरिकी मुद्रा की मजबूती को दिखाता है, 97.89 के आसपास बना रहा। जब डॉलर मजबूत होता है तो रुपये जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बढ़ता है। गुरुवार को बाजार बंद था, लेकिन वैश्विक हालात के कारण शुक्रवार को खुलते ही रुपया कमजोर दिखा। निवेशक सुरक्षित माने जाने वाले डॉलर की तरफ झुकते नजर आए।
कच्चे तेल ने बढ़ाई परेशानी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 71.77 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए तेल महंगा होने पर डॉलर की मांग बढ़ जाती है। इससे रुपये पर और दबाव आता है। तेल की कीमतों में हल्की बढ़त भी बाजार की चिंता बढ़ाने के लिए काफी है, खासकर जब वैश्विक तनाव बढ़ रहा हो।
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शेयर बाजार में भी कमजोरी
रुपये की गिरावट के साथ घरेलू शेयर बाजार में भी दबाव दिखा। बीएसई सेंसेक्स करीब 150 अंक गिरकर 82,347 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 करीब 35 अंक टूटकर 25,419 पर रहा। विदेशी संस्थागत निवेशक भी बिकवाली करते नजर आए। आंकड़ों के मुताबिक उन्होंने 880 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे, जिससे बाजार का मूड और कमजोर हुआ।
एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं
ट्रेजरी विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुपये को नीचे खींच रही है। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से बाजार में डॉलर की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने की कोशिश की जा रही है, जिससे गिरावट ज्यादा गहरी नहीं हो रही।
आगे क्या रह सकता है असर
अगर अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़ता है या कच्चे तेल की कीमतें ऊपर जाती हैं, तो रुपये पर और दबाव बन सकता है। फिलहाल बाजार की नजर वैश्विक हालात, तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर टिकी है। आम लोगों के लिए इसका असर महंगे आयात और पेट्रोल-डीजल की कीमतों के रूप में दिख सकता है।