अमेरिका में टैरिफ को लेकर नए ऐलान के बाद दुनियाभर के बाजारों में हलचल देखी गई। पहले टैरिफ पर अदालत की टिप्पणी और फिर नए ग्लोबल शुल्क के संकेतों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया। वॉल स्ट्रीट से लेकर एशियाई बाजारों तक दबाव दिखाई दिया। लेकिन इस माहौल में भारतीय रुपया अपेक्षाकृत मजबूत नजर आया, जिसने शुरुआती कारोबार में बढ़त दर्ज की।
रुपये की शुरुआती मजबूती
बुधवार को अंतरबैंक बाजार में रुपया मजबूत होकर 90.89 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। पिछले सत्र में यह 90.95 पर बंद हुआ था। विशेषज्ञों के मुताबिक कमजोर डॉलर और घरेलू बाजार की अच्छी शुरुआत ने रुपये को सहारा दिया। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बढ़त को सीमित रखा।
डॉलर की मांग बनी हुई
विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों का कहना है कि डॉलर की मांग अभी भी बनी हुई है। बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद रुपया सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। अनुमान है कि दिनभर में यह 90.75 से 91.25 के बीच रह सकता है। अगर डॉलर में गिरावट आती है तो फिर से खरीदारी बढ़ सकती है।
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शेयर बाजार का रुख
घरेलू शेयर बाजार में भी मजबूती देखी गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने बढ़त के साथ कारोबार किया। इससे निवेशकों का मनोबल कुछ हद तक बेहतर हुआ। हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से बिकवाली जारी रही, जिससे सतर्कता का माहौल बना हुआ है।
कच्चे तेल और डॉलर सूचकांक का असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। इससे आयात पर दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर रुपये पर पड़ता है। वहीं डॉलर सूचकांक में हल्की गिरावट देखने को मिली, जिसने रुपये को सहारा दिया। इन दोनों कारकों के बीच संतुलन बना हुआ है।
आगे की दिशा क्या होगी
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक फैसले और तेल की कीमतें रुपये की चाल तय करेंगी। फिलहाल रुपया स्थिरता दिखा रहा है, लेकिन बाजार की अनिश्चितता बनी हुई है। निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय संकेतों पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है।