सोमवार को भारतीय रुपया अचानक बड़ी गिरावट के साथ इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले 95.22 तक गिर गया, जिसने बाजार में हलचल मचा दी। शुरुआत में रुपये ने मजबूती दिखाई थी, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं सकी। कुछ ही घंटों में हालात पलट गए और रुपया लगातार कमजोर होता चला गया। इससे निवेशकों और आम लोगों दोनों में चिंता बढ़ गई है।
शुरुआती बढ़त क्यों नहीं टिक पाई
दिन की शुरुआत में रुपया करीब 93.62 पर खुला और थोड़ी देर के लिए 93.57 तक मजबूत भी हुआ। यह पिछले बंद स्तर से अच्छी बढ़त मानी जा रही थी। लेकिन जैसे-जैसे वैश्विक बाजार से नकारात्मक संकेत मिलने लगे, रुपया दबाव में आ गया। डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने रुपये की स्थिति कमजोर कर दी। यही वजह रही कि शुरुआती मजबूती पूरी तरह खत्म हो गई।
जंग का सीधा असर बाजार पर
मिडिल ईस्ट में चल रही जंग ने वैश्विक बाजार को हिला दिया है। निवेशक अब सुरक्षित विकल्पों की ओर भाग रहे हैं, जिससे डॉलर मजबूत हो रहा है। इसका सीधा असर भारतीय रुपये पर पड़ रहा है। जब भी दुनिया में तनाव बढ़ता है, तो विदेशी निवेश भारत जैसे बाजारों से पैसा निकालने लगते हैं। इससे रुपये की मांग घटती है और उसकी कीमत गिरती चली जाती है।
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तेल की कीमतों ने बढ़ाई टेंशन
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी रुपये के गिरने की बड़ी वजह बनी है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल विदेश से खरीदता है। जब तेल महंगा होता है, तो उसे खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर हो जाता है। यही कारण है कि मौजूदा हालात में रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है।
आम लोगों पर क्या होगा असर
रुपये की कमजोरी का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा विदेश से आने वाले सामान जैसे मोबाइल, लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक चीजें भी महंगी हो सकती हैं। विदेश यात्रा और पढ़ाई भी महंगी हो जाएगी, क्योंकि डॉलर खरीदने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
रोजमर्रा की चीजें भी होंगी महंगी
इसका असर सिर्फ बड़े खर्चों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित होगी। माल ढुलाई महंगी होने से खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। धीरे-धीरे महंगाई बढ़ने का दबाव भी दिख सकता है। ऐसे में अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में आम आदमी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।