अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को झटका दिया है। होर्मुज स्ट्रेट में बाधा के कारण तेल और गैस की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिसका असर भारत समेत कई देशों पर पड़ा है। ऐसे हालात में रूस एक बार फिर भारत के लिए भरोसेमंद साथी बनकर सामने आया है और कोयले की सप्लाई बढ़ा दी है।
होर्मुज संकट ने बढ़ाई चिंता
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल-गैस की सप्लाई होती है। हालांकि भारतीय जहाजों को आवाजाही की छूट मिली हुई है, लेकिन युद्ध जैसे माहौल में वहां से सुरक्षित गुजरना आसान नहीं है। भारतीय नौसेना को जहाजों की निगरानी में बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जिससे ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।
रूसी कोयला बना बड़ा सहारा
ऐसे समय में रूस से मिल रही कोयले की सप्लाई भारत के लिए राहत लेकर आई है। कोयले को ‘ब्लैक गोल्ड’ भी कहा जाता है और यह बिजली उत्पादन के लिए बेहद जरूरी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस से कोयले की आपूर्ति तेजी से बढ़ाई गई है ताकि भारत में बिजली सप्लाई प्रभावित न हो और उद्योगों का कामकाज सुचारू रूप से चलता रहे।
मार्च से तेजी से बढ़ा आयात
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्च की शुरुआत से ही रूस से कोयले का आयात लगातार बढ़ रहा है। बड़े-बड़े कार्गो जहाज रूसी बंदरगाहों से निकलकर भारतीय तटों तक पहुंच रहे हैं। फरवरी की तुलना में मार्च के पहले तीन हफ्तों में ही कोयले का आयात 25 फीसदी तक बढ़ गया है। सालाना आधार पर देखें तो यह बढ़ोतरी करीब 50 फीसदी तक पहुंच चुकी है।
आगे और बढ़ सकता है आंकड़ा
विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च के अंत तक यह आयात 35 फीसदी तक पहुंच सकता है। इससे साफ है कि भारत और रूस के बीच ऊर्जा व्यापार तेजी से मजबूत हो रहा है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हो रही है, जब दुनिया के कई देश ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं।
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तेल और गैस सप्लाई में भी तेजी
कोयले के साथ-साथ रूस से तेल की सप्लाई भी तेजी से बढ़ी है। जनवरी के मुकाबले भारत के कुल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी तक बढ़ चुकी है। इसके अलावा दोनों देश लिक्विफाइड नेचुरल गैस की सप्लाई को लेकर भी बातचीत कर रहे हैं, जिससे भविष्य में ऊर्जा सहयोग और मजबूत हो सकता है।
भारत-रूस संबंध और मजबूत
यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि वैश्विक संकट के समय रूस भारत के लिए अहम साझेदार बना हुआ है। बढ़ती ऊर्जा साझेदारी न सिर्फ भारत की जरूरतों को पूरा कर रही है, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों को भी नई मजबूती दे रही है।