New Employment Destination: खाड़ी देशों के बाद अब रूस भारतीय कामगारों के लिए रोजगार का बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। यूक्रेन के साथ लंबे समय से चल रहे युद्ध और घटती आबादी के कारण रूस में श्रमिकों की भारी कमी हो गई है। इसका सीधा फायदा भारतीय युवाओं और मजदूरों को मिल रहा है। कंस्ट्रक्शन, ऑयल-गैस, मैन्युफैक्चरिंग और फैक्ट्री सेक्टर में बड़ी संख्या में भारतीयों की मांग है। हाल के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले चार वर्षों में रूस जाने वाले भारतीय श्रमिकों की संख्या में करीब 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। पश्चिम बंगाल, बिहार, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से बड़ी संख्या में लोग अब रूस का रुख कर रहे हैं।
मोटी सैलरी, फ्री रहना-खाना
रूस में काम करने वाले भारतीयों को 50 हजार से लेकर 1.5 लाख रुपये महीने तक की सैलरी मिल रही है। अनुभव और ओवरटाइम के आधार पर यह रकम और बढ़ सकती है। वेल्डर, ड्राइवर, इलेक्ट्रीशियन, बढ़ई और फैक्ट्री ऑपरेटर जैसे ब्लू-कॉलर जॉब्स की सबसे ज्यादा मांग है। खास बात यह है कि खदानों, रिफाइनरियों और ऑयलफील्ड्स में काम करने वालों को कई कंपनियां रहने और खाने की सुविधा मुफ्त देती हैं, जिससे खर्च कम और बचत ज्यादा होती है। वहीं आईटी और इंजीनियरिंग जैसे प्रोफेशनल सेक्टर में काम करने वालों को 1.8 लाख रुपये तक का पैकेज मिल सकता है।
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कैसे करें आवेदन, ठगी से बचें
रूस में नौकरी के लिए सही और सुरक्षित प्रक्रिया अपनाना बेहद जरूरी है। उम्मीदवारों को भारत में सरकार द्वारा लाइसेंस प्राप्त भर्ती एजेंसियों के जरिए ही आवेदन करना चाहिए। नौकरी पक्की होने पर रूसी सरकार की ओर से जारी ‘इनविटेशन लेटर’ सबसे अहम दस्तावेज होता है, जिसके बिना वर्क वीजा नहीं मिलता। इसके अलावा पासपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट, पुलिस क्लीयरेंस और जरूरी शैक्षणिक दस्तावेज जमा करने होते हैं। वीजा प्रक्रिया में 7 से 20 दिन लग सकते हैं। रूस पहुंचने के बाद माइग्रेशन रजिस्ट्रेशन और वर्क परमिट लेना अनिवार्य है। सही जानकारी और भरोसेमंद एजेंसी के जरिए कदम उठाकर रूस में बेहतर भविष्य की राह बनाई जा सकती है।