रूस ने 15 अप्रैल 2026 से भारतीयों समेत स्किल्ड विदेशी नागरिकों के लिए एक नई और बेहद आसान निवास योजना शुरू करने का फैसला किया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत यात्रा से पहले इस बड़े प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए, जिससे भारत-रूस संबंधों में और मजबूती आने की उम्मीद है। इस योजना के तहत साइंस, टेक्नोलॉजी, इंडस्ट्री, एजुकेशन, स्पोर्ट्स और कल्चर जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को मूल्यवान विशेषज्ञ माना जाएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि इन्हें रूसी भाषा, इतिहास या कानून की कोई परीक्षा नहीं देनी होगी। यानी योग्य लोग सीधे तीन साल का अस्थायी निवास या स्थायी निवास पा सकते हैं
किन लोगों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह योजना उन प्रोफेशनल्स और उनके परिवारों के लिए है जो विकास से जुड़े क्षेत्रों में महत्वपूर्ण काम करते हैं। वे लोग बिना किसी इमिग्रेशन कोटा के निवास परमिट के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह मौका खासकर भारत के आईटी सेक्टर, इंजीनियरिंग, रिसर्च, स्पोर्ट्स ट्रेनिंग, शिक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्र में काम कर रहे लोगों के लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है। आवेदन प्रक्रिया दो चरणों में होगी—पहले आवेदक एक नामित एजेंसी को अपने डॉक्यूमेंट भेजेंगे, और योग्य पाए जाने पर दूसरे चरण में इमिग्रेशन विभाग को TRP या PRP के लिए आवेदन करेंगे।
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बिना वर्क परमिट के काम की सुविधा
इस नई स्कीम की बड़ी राहत यह है कि चयनित उम्मीदवारों को वर्क परमिट की जरूरत नहीं पड़ेगी। जैसे ही एजेंसी उनकी प्रोफाइल को मंजूर कर देगी, उन्हें एक साल का बिजनेस वीजा मिलेगा और वे रूस जाकर निवास प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे। मंजूरी पाने के बाद आवेदनकर्ता और उनके परिवारों को रूस में बिना अतिरिक्त अनुमति के काम करने की आजादी होगी। यह सुविधा उन देशों में बेहद दुर्लभ है जहां भाषा और कोटा नियम बेहद कड़े होते हैं।
30 दिनों में पूरा होगा निवास परमिट
सरकार का दावा है कि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और तेज होगी। आवेदनकर्ता भारत से ही डिजिटल आवेदन कर सकेंगे। निवास परमिट की प्रक्रिया 30 दिनों के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। एजेंसी की मंजूरी एक साल के लिए मान्य रहेगी, यानी इस अवधि में आवेदक आराम से TRP या PRP के लिए अप्लाई कर सकते हैं। रूस ने साफ कहा है कि यह कदम देश में प्रतिभाशाली और स्किल्ड विदेशी नागरिकों को आकर्षित करने के लिए लिया गया है ताकि वे रूस के तकनीकी और आर्थिक विकास में योगदान दे सकें।