India Air Defense Capabilities: भारत अपनी वायु रक्षा प्रणाली को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इसी क्रम में रूस ने भारत को अत्याधुनिक शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम Pantsir-S1M देने का प्रस्ताव रखा है। यह सिस्टम खास तौर पर ड्रोन और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले खतरों से सुरक्षा देने के लिए तैयार किया गया है। बदलते युद्ध के स्वरूप को देखते हुए भारत इस तरह के सिस्टम पर गंभीरता से विचार कर सकता है।
ड्रोन हमलों से बढ़ी चुनौती
हाल के अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में यह देखा गया है कि छोटे और सस्ते ड्रोन बड़े और महंगे हथियारों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। झुंड में किए गए ड्रोन हमले बड़े एयर डिफेंस सिस्टम को ओवरलोड कर देते हैं। ऐसे में केवल लंबी दूरी की रक्षा प्रणाली पर्याप्त नहीं होती, बल्कि अंतिम स्तर पर मजबूत सुरक्षा की भी जरूरत होती है।
Pantsir-S1M की खासियतें
यह एक मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम है, जो मिसाइल और गन दोनों के जरिए हमलों को रोक सकता है। यह करीब 80 किलोमीटर दूर तक लक्ष्य की पहचान कर सकता है और एक साथ कई टारगेट को ट्रैक करने में सक्षम है। इसकी मिसाइलें 30 किलोमीटर तक मार कर सकती हैं और ऊंचाई पर उड़ते लक्ष्यों को भी निशाना बना सकती हैं। इसके अलावा इसमें लगी ऑटोमैटिक गन नजदीकी खतरों को तुरंत खत्म करने में सक्षम है।
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S-400 की सुरक्षा में अहम भूमिका
भारत के पास मौजूद S-400 जैसे लंबी दूरी के सिस्टम बड़े लक्ष्यों को नष्ट करने में सक्षम हैं, लेकिन छोटे ड्रोन या लो-फ्लाइंग हथियारों से उन्हें खतरा बना रहता है। ऐसे में Pantsir-S1M अंतिम सुरक्षा परत के रूप में काम करेगा और उन खतरों को खत्म करेगा जो पहली रक्षा लाइन को पार कर जाएं।
मल्टी-लेयर डिफेंस की दिशा में कदम
यह सिस्टम भारत के मौजूदा स्वदेशी रक्षा तंत्र के साथ मिलकर काम करेगा और मल्टी-लेयर एयर डिफेंस नेटवर्क को और मजबूत बनाएगा। इससे महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों, रडार और कमांड सेंटर की सुरक्षा बेहतर होगी। कुल मिलाकर यह प्रस्ताव भारत की रक्षा रणनीति को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है।