मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और पर्शियन गल्फ में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अमेरिका से एक अहम अनुरोध किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार भारत चाहता है कि रूस से तेल खरीद पर दी गई अमेरिकी छूट को आगे भी जारी रखा जाए। सरकार का मानना है कि मौजूदा हालात में ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखना देश की आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है। सरकार को आशंका है कि हालात बिगड़ने पर ईंधन बाजार में नई उथलपुथल बढ़ सकती है।
छूट का बड़ा असर
छूट की यह व्यवस्था पहली बार मार्च में शुरू हुई थी और बाद में इसकी अवधि बढ़ाकर 16 मई 2026 तक कर दी गई। इसी फैसले के कारण भारत रूस से रियायती कीमतों पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद पा रहा है। इससे भारत को ऊर्जा लागत नियंत्रित रखने में भी सहायता मिली है। इससे रिफाइनरी कंपनियों को भी राहत मिलने की उम्मीद बनी रही। कई ऊर्जा विशेषज्ञ इसे भारत के लिए आर्थिक राहत वाला कदम मान रहे हैं।
बढ़ा वैश्विक दबाव
यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका लगातार भारत पर रूस से तेल खरीद कम करने का दबाव बनाता रहा है। अमेरिका का तर्क रहा है कि इससे मॉस्को पर आर्थिक दबाव बनाया जा सकता है। लेकिन अब ईरान क्षेत्र में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी आशंकाओं ने तेल बाजार को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। विशेषज्ञ इसे वैश्विक बाजार के लिए संवेदनशील स्थिति मान रहे हैं। इससे आयात करने वाले देशों की चिंता भी लगातार बढ़ती नजर आ रही है।
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भारत की बड़ी चिंता
रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय अधिकारियों ने अमेरिकी पक्ष से कहा है कि अगर तेल बाजार में अस्थिरता जारी रही तो इसका असर आम लोगों पर पड़ सकता है। भारत जैसे देश में ऊर्जा जरूरतें बहुत बड़ी हैं और किसी भी आपूर्ति संकट का असर गैस, ईंधन और रोजमर्रा की जरूरतों पर दिखाई दे सकता है। यही वजह है कि भारत सप्लाई चेन को लेकर सतर्क दिखाई दे रहा है।
रूस ने दिया भरोसा
इस बीच रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भरोसा दिलाया है कि रूस भारत के ऊर्जा हितों को सुरक्षित रखने की पूरी कोशिश करेगा। उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में रूस ने अपने साझेदारों के साथ जिम्मेदारियां निभाई हैं और भारत के साथ तेल, गैस तथा दूसरे सहयोग लगातार जारी रहेंगे। उन्होंने दोनों देशों के लंबे सहयोग का भी खास तौर पर जिक्र किया।
आयात पर बनी नजर
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि भारत ने मई महीने में रिकॉर्ड स्तर पर रूसी तेल आयात किया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबा खिंचता है तो भारत सस्ते रूसी तेल पर अपनी निर्भरता और बढ़ा सकता है ताकि घरेलू बाजार में कीमतों को संतुलित रखा जा सके और आर्थिक दबाव कम हो सके। सरकार की नजर अंतरराष्ट्रीय बाजार की हर गतिविधि पर बनी हुई है।