अमेरिका और भारत के बीच 2 फरवरी को हुई ट्रेड डील के बाद रूसी तेल को लेकर बड़ा दावा सामने आया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जता दी है। हालांकि भारत या रूस की ओर से इसकी पुष्टि नहीं हुई। इसी बीच रूसी तेल का आयात जारी है और अब सामने आया है कि यह तेल खुले रास्ते से नहीं, बल्कि समुद्र में सक्रिय एक गुप्त नेटवर्क के जरिए भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच रहा है।
ट्रेड डील के दावों और हकीकत का फर्क
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा था। अमेरिकी प्रतिबंधों और भारी टैरिफ की चेतावनियों के बाद भारत ने आयात की रफ्तार जरूर घटाई, लेकिन इसे पूरी तरह बंद नहीं किया। ट्रंप के दावों के उलट जमीनी सच्चाई कुछ और है। मीडिया रिपोर्ट्स और शिपिंग डेटा यह इशारा कर रहे हैं कि प्रतिबंधित रूसी तेल अब भी भारत पहुंच रहा है, बस तरीका बदल गया है।
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क्या है शैडो फ्लीट का खेल
शैडो फ्लीट दरअसल टैंकरों और जहाजों का एक ऐसा गुप्त नेटवर्क है, जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए नकली नाम, फर्जी झंडे और शेल कंपनियों का सहारा लेता है। ये जहाज समुद्र में अपनी पहचान छिपाने के लिए AIS सिस्टम बंद कर देते हैं, जिससे उनकी लोकेशन ट्रैक नहीं हो पाती। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने के लिए रूस इस नेटवर्क का तेजी से इस्तेमाल कर रहा है।
कौन-कौन से टैंकर भारतीय बंदरगाहों पर
शिप ट्रैकिंग डेटा के आधार पर Kpler ने बताया है कि रूसी शैडो फ्लीट से जुड़े कम से कम चार टैंकर भारतीय बंदरगाहों पर सक्रिय हैं। जियानिस चेन्नई रिफाइनरी में, निक्सोरा पारादीप रिफाइनरी में और टिबुरोन वाडिनार रिफाइनरी में यूराल्स ग्रेड का तेल उतार रहा है। सीजन्स 1 टैंकर को भी वाडिनार के बाहर ट्रैक किया गया है।
1400 जहाजों का बढ़ता गुप्त बेड़ा
शैडो फ्लीट का दायरा लगातार बढ़ रहा है। अनुमान है कि इस नेटवर्क में करीब 1400 जहाज शामिल हैं। रूस न सिर्फ नए जहाज जोड़ रहा है, बल्कि पहले वेनेजुएला और ईरान का तेल ढोने वाले टैंकरों को भी दोबारा झंडा देकर अपने बेड़े में शामिल कर रहा है। प्रतिबंधों के बावजूद यह गुप्त तंत्र और मजबूत होता दिख रहा है, जिससे वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में नई बेचैनी पैदा हो गई है।