
Sachin Yadav: जापान के टोक्यो में हो रही वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में भारत को बड़ा सरप्राइज मिला। यहां बागपत के सचिन यादव ने अपने दमदार प्रदर्शन से सभी को चौंका दिया। भले ही वह महज 40 सेंटीमीटर से मेडल से चूक गए, लेकिन उन्होंने ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा और पाकिस्तान के अरशद नदीम जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया। सचिन ने कम समय में ही खुद को एक उभरते हुए जैवलिन थ्रोअर के रूप में स्थापित कर लिया है और उनका प्रदर्शन भारत के लिए नई उम्मीद जगाता है।
क्रिकेट से जैवलिन तक का सफर
सचिन यादव शुरुआत में क्रिकेटर बनना चाहते थे और महेंद्र सिंह धोनी व जसप्रीत बुमराह को अपना आदर्श मानते थे। लेकिन उनकी किस्मत ने उन्हें नया रास्ता दिखाया। पड़ोसी और शुरुआती कोच संदीप यादव ने उनकी गेंदबाजी शैली और ऊंचाई देखकर सुझाव दिया कि वे जैवलिन थ्रो में उतरें। इसके बाद सचिन ने जमकर मेहनत की और 2024 की राष्ट्रीय ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 80.04 मीटर के थ्रो से गोल्ड जीता। वहीं, फेडरेशन कप और नेशनल गेम्स में लगातार स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपनी पहचान मजबूत की। देहरादून के नेशनल गेम्स में उनका एक प्रैक्टिस थ्रो लगभग 90 मीटर तक गया था, लेकिन हल्के स्टेप आउट के कारण वह फाउल करार दिया गया।
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चोटों से जंग और नई ऊंचाई
सचिन को चोटों ने कई बार परेशान किया। 2022 में कोहनी की सर्जरी के बाद वह लंबे समय तक मैदान से बाहर रहे। लेकिन वापसी करते हुए उन्होंने 72 मीटर से शुरुआत कर 2025 तक 85.16 मीटर तक का थ्रो हासिल किया। दिल्ली में नवल सिंह की कोचिंग और अंतरराष्ट्रीय कोच माइकल एमजी के मार्गदर्शन ने उनके खेल को नई दिशा दी। यूपी पुलिस में कार्यरत सचिन ने महज चार साल में ऐसा मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। एशियाई चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल और अब वर्ल्ड चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया है कि सचिन यादव भारतीय जैवलिन थ्रो का भविष्य हैं।