
दिल्ली की 22 गज की पट्टी पर शुक्रवार को वो नजारा देखने को मिला जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. KL राहुल के आउट होने के बाद यशस्वी जायसवाल के साथ साईं सुदर्शन ने कमाल दिखाया, जिसने फैंस का दिल जीत लिया, दरअसल इंग्लैंड की मुश्किल पिचों पर जहां उनका बल्ला बार-बार खामोश हो गया था, वहां दिल्ली की मिट्टी पर वही बल्ला गरज उठा. लगातार आलोचनाओं, सवालों और सोशल मीडिया ट्रोल्स के बीच ये पारी साईं के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं थी. शुरुआत में थोड़ी सावधानी, लेकिन फिर जैसे-जैसे टाइम बीतता गया, साईं का आत्मविश्वास बढ़ता गया और उन्होंने यशस्वी जायसवाल के साथ मिलकर गेंदबाजों को नचाना शुरू कर दिया. दोनों ने मिलकर 193 रनों की साझेदारी रच दी जिसने मैच का रुख पलट दिया और साईं के करियर में नई जान फूंक दी.
साईं सुदर्शन के कमबैक की कहानी
साईं सुदर्शन के लिए ये पारी सिर्फ रन नहीं, बल्कि कमबैक की कहानी थी. इंग्लैंड और अहमदाबाद में फ्लॉप होने के बाद हर किसी को लग रहा था कि शायद साईं अब टीम से बाहर हो जाएंगे. मगर दिल्ली में उन्होंने सबको गलत साबित कर दिया. धीमी शुरुआत के बाद उन्होंने ऐसी लय पकड़ी कि हर चौके पर उनके चेहरे का आत्मविश्वास साफ दिख रहा था. उन्होंने हर गेंदबाज को जवाब दिया चाहे तेज गेंदबाज की स्विंग हो या स्पिनर की गुगली. उनकी 87 रनों की पारी में 12 चौके थे और हर चौका जैसे आलोचकों के लिए एक जवाब था मैं खत्म नहीं, अब शुरू हुआ हूं.
तकनीक, धैर्य, एग्रेसन का जबरदस्त मेल
साईं की इस पारी में तकनीक, धैर्य और एग्रेसन तीनों का जबरदस्त मेल देखने को मिला. खासकर बाएं हाथ के स्पिनर्स के खिलाफ उन्होंने जिस अंदाज़ में बैकफुट पंच लगाए, वो किसी अनुभवी बल्लेबाज़ की झलक थी. उनकी शॉट सलेक्शन और टाइमिंग ने सबको प्रभावित किया. पिच पर साईं की बॉडी लैंग्वेज कुछ और ही कहानी कह रही थी वो न सिर्फ रन बना रहे थे, बल्कि ये साबित कर रहे थे कि वो टीम इंडिया के लिए भरोसे का दूसरा नाम हैं. भले ही वो शतक से चूक गए, लेकिन इस 87 रनों की पारी ने उन्हें आलोचकों की नज़रों में नहीं, बल्कि फैंस के दिलों में जगह दिला दी.
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करियर को मिला नया जीवनदान
साईं सुदर्शन की ये पारी इसलिए भी खास रही क्योंकि उन्होंने अपने करियर को जैसे नया जीवनदान दे दिया. वेस्टइंडीज के खिलाफ नाकामी के बाद सवाल उठे थे कि उन्हें टीम में जगह क्यों दी गई लेकिन अब वही आवाज़ें तारीफ में बदल गई हैं. दिल्ली में साईं ने दिखा दिया कि क्लास कभी फेल नहीं होती, बस वक्त आने का इंतज़ार करती है. अब सेलेक्टर्स उन्हें नज़रअंदाज नहीं कर पाएंगे और कप्तान के पास एक भरोसेमंद नाम होगा.