Sambhal violence case: संभल हिंसा प्रकरण में अदालत के अहम आदेश के बाद मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा एएसपी अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए जाने के बाद पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया सामने आई है। इस आदेश को पीड़ित पक्ष न्याय की दिशा में बड़ा कदम मान रहा है और अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
पुलिस पर आरोप
घायल युवक आलम की बहन रजिया ने सामने आकर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनके भाई को किसी और ने नहीं, बल्कि पुलिसकर्मियों ने ही गोली मारी थी। रजिया के अनुसार आलम रोज़मर्रा की मजदूरी कर परिवार का गुजारा करता था और घटना वाले दिन वह पापे बेचने के लिए घर से निकला था, उसे हिंसा की कोई जानकारी नहीं थी।
पीड़ित का पक्ष
रजिया का आरोप है कि उनके भाई को पीछे से तीन गोलियां मारी गईं। उन्होंने कहा कि आलम की उम्र करीब 21–22 साल है और वह परिवार के लिए कमाने वाला सदस्य था। परिवार का दावा है कि इस पूरी घटना में उनके भाई को जानबूझकर निशाना बनाया गया, जिसके बाद से वह न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
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न्यायपालिका पर भरोसा
पीड़ित परिवार का कहना है कि बीते एक साल से वे अलग-अलग स्तरों पर न्याय की गुहार लगा रहे थे। कई बार शिकायतें खारिज हुईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। रजिया ने कहा कि उन्हें शुरू से ही न्यायपालिका पर भरोसा था, इसी वजह से वे लगातार कानूनी लड़ाई लड़ते रहे।
आगे की मांग
अदालत के एफआईआर के आदेश के बाद परिवार को उम्मीद जगी है कि अब मामले की निष्पक्ष जांच होगी। पीड़ित पक्ष ने मांग की है कि जिन पुलिस अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, उनके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि दोषियों को सजा मिले और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।