
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा की जांच के लिए गठित न्यायिक कमेटी ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है. 28 अगस्त 2025 को सौंपी गई इस 450 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट में संभल की जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी) में आए बदलाव और ऐतिहासिक दंगों का विस्तार से उल्लेख किया गया है. कमेटी में इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस डीके अरोड़ा, रिटायर्ड IAS अमित मोहन प्रसाद और रिटायर्ड IPS अरविंद कुमार जैन शामिल थे. रिपोर्ट में शाही जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर विवाद पर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है.
आजादी के समय हिंदुओं की आबादी थी 45%
रिपोर्ट के अनुसार, संभल में आजादी के समय 1947 में हिंदू आबादी 45% थी, जो अब घटकर मात्र 15-20% रह गई है. कमेटी ने दावा किया कि बार-बार हुए दंगों और तुष्टिकरण की राजनीति ने जिले की जनसांख्यिकी को पूरी तरह बदल दिया. सूत्रों के मुताबिक संभल में 1947 से अब तक 15 दंगे हुए, जिनमें 1978 का दंगा सबसे भयावह था, जिसमें कथित तौर पर 184 हिंदुओं की हत्या हुई थी. इन दंगों ने हिंदू आबादी को कम करने में अहम भूमिका निभाई.
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हरिहर मंदिर को लेकर भी दावा
रिपोर्ट में हरिहर मंदिर के ऐतिहासिक अस्तित्व के साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है. मस्जिद के अंदर दो वट वृक्ष और एक कुआं मिला, जो हिंदू मंदिरों की विशेषता माने जाते हैं. यह विवाद तब शुरू हुआ जब हिंदू पक्ष ने दावा किया कि मस्जिद का निर्माण मुगलकाल में हरिहर मंदिर को तोड़कर किया गया था. 19 नवंबर 2024 को कोर्ट के आदेश पर शुरू हुए सर्वे के दौरान हिंसा भड़क उठी, जिसमें चार लोगों की मौत हुई और कई पुलिसकर्मी घायल हुए. रिपोर्ट में हिंसा के कारणों, प्रशासन की भूमिका और खुफिया तंत्र की नाकामी का भी जिक्र है. यह दावा किया गया कि सर्वे की जानकारी लीक होने से भीड़ जुटी और हिंसा भड़की. कमेटी ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुझाव भी दिए हैं. यह रिपोर्ट अब राज्य कैबिनेट के समक्ष पेश की जाएगी और विधानसभा सत्र में रखी जाएगी. संभल की घटना ने क्षेत्रीय सांप्रदायिक तनाव को फिर से उजागर किया है.