चुनावी माहौल के बीच मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु की सियासत को हिला देने वाला फैसला सुनाया है। उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए गए बयान को अदालत ने नफरत फैलाने वाला बताया है। न्यायालय ने कहा कि इस तरह के बयान समाज में तनाव बढ़ा सकते हैं और सनातन धर्म को मानने वालों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। इस फैसले को सत्तारूढ़ देएमके के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
अमित मालवीय को राहत
इस पूरे मामले में अदालत ने भारतीय जनता पार्टी के नेता अमित मालवीय को बड़ी राहत दी है। न्यायालय ने उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द कर दिया। अदालत का कहना था कि मालवीय ने केवल सनातन धर्म का बचाव किया था। उनके खिलाफ कार्रवाई करना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होता। न्यायालय ने साफ कहा कि प्रतिक्रिया देने वाले व्यक्ति को दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं है।
भाषण पर अदालत की कड़ी टिप्पणी
न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि उदयनिधि स्टालिन का भाषण देश के बड़े हिंदू समाज के खिलाफ था। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि ऐसे बयान से हिंसा और बड़े टकराव का अर्थ निकाला जा सकता है। न्यायमूर्ति एस श्रीमति ने कहा कि नफरत भरे भाषण समाज को बांटते हैं और इससे गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
क्यों शुरू हुआ विवाद
यह विवाद वर्ष 2023 में आयोजित सनातन उन्मूलन सम्मेलन से जुड़ा है। इस कार्यक्रम में उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना बीमारियों से की थी और इसके अंत की बात कही थी। इस बयान के बाद देशभर में विरोध शुरू हुआ और कई स्थानों पर कानूनी याचिकाएं दायर की गईं। मामला मद्रास उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय तक पहुंचा।
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मालवीय पर केस कैसे दर्ज हुआ
सम्मेलन के बाद अमित मालवीय ने उदयनिधि के भाषण का वीडियो साझा किया और उस पर सवाल उठाए। इसके बाद देएमके से जुड़े एक पदाधिकारी की शिकायत पर उनके खिलाफ नफरत फैलाने की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया। मालवीय ने इसे राजनीति से प्रेरित बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
अदालत का साफ संदेश
अदालत ने कहा कि सनातन धर्म को लेकर बार बार आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई हैं और यह चिंताजनक है। न्यायालय ने यह भी कहा कि किसी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले बयानों पर समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। इस फैसले के बाद तमिलनाडु की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और चुनावी साल में यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है।