कहते हैं सच्चा मार्गदर्शक अपने शिष्य की पहचान पहले ही कर लेता है। वेस्टइंडीज के खिलाफ हुए मुकाबले में कुछ ऐसा ही देखने को मिला। टीम इंडिया के सामने 196 रन का मुश्किल लक्ष्य था और दबाव साफ दिख रहा था। ऐसे समय में संजू सैमसन ने जिम्मेदारी संभाली और मैच को अपने दम पर मोड़ दिया। उनकी नाबाद 97 रन की पारी ने सिर्फ जीत ही नहीं दिलाई, बल्कि भरोसे की कहानी भी लिख दी।
पुरानी बात हुई सच
साल 2020 में जब संजू की जगह को लेकर सवाल उठ रहे थे, तब गौतम गंभीर ने खुलकर उनका समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि अगर संजू को सही मौके मिले तो वह बड़ा खिलाड़ी बनेंगे। उस समय कई लोगों ने इसे बड़ी बात मान लिया था। लेकिन अब वही गंभीर टीम इंडिया के कोच हैं और उनके सामने संजू ने वैसा ही प्रदर्शन किया जैसा उन्होंने सालों पहले कहा था।
196 का पुराना जख्म भरा
2016 में वानखेड़े में 196 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत हार गया था। वह हार लंबे समय तक फैंस को याद रही। अब 10 साल बाद फिर वही आंकड़ा सामने था। फर्क बस इतना था कि इस बार भारत को जीत चाहिए थी। संजू सैमसन ने 50 गेंदों पर 12 चौके और 4 छक्के लगाकर टीम को 199 रन तक पहुंचा दिया। इस जीत के साथ 10 साल पुराना दर्द भी हल्का हो गया।
97 का खास कनेक्शन
संजू 3 रन से शतक से चूक गए, लेकिन 97 रन की यह पारी खास बन गई। 2011 वर्ल्ड कप फाइनल में गौतम गंभीर ने भी 97 रन बनाए थे और टीम को जीत दिलाई थी। अब संजू ने भी बड़े मंच पर वही आंकड़ा दोहराया। दोनों पारियों में समानता यह रही कि टीम दबाव में थी और एक खिलाड़ी ने जिम्मेदारी उठाई।
इसे भी पढ़ें : 97 पर रुके लेकिन इतिहास रच गए संजू, 196 का किला फतह कर टीम इंडिया फिर इंग्लैंड से भिड़ेगी
स्टेडियम में जश्न का माहौल
जैसे ही जीत मिली, स्टेडियम में उत्साह फैल गया। देशभक्ति के गीत गूंजने लगे और फैंस खुशी से झूम उठे। सोशल मीडिया पर भी संजू की पारी की खूब चर्चा हुई। यह जीत सिर्फ एक मैच की नहीं थी, बल्कि भावनाओं से जुड़ी हुई थी।
अब अगली चुनौती इंग्लैंड
अब टीम इंडिया के सामने सेमीफाइनल में इंग्लैंड की चुनौती है। मुकाबला मुंबई में होगा और दबाव पहले से ज्यादा रहेगा। यह नॉकआउट मैच है, जहां छोटी गलती भी भारी पड़ सकती है। फैंस के मन में सवाल है कि क्या संजू का यह फॉर्म आगे भी जारी रहेगा और क्या टीम इंडिया ट्रॉफी तक पहुंच पाएगी।