Salary Saving Tips: महीने की 1 तारीख को जो चेहरा मुस्कुराहट से चमकता है, 25 तारीख आते-आते उस पर तनाव की लकीरें दिखने लगती हैं। महीने के आखिरी हफ्ते तक पहुंचते-पहुंचते खर्च चलाने लायक पैसे भी हाथ में नहीं बचते हैं। आज के दौर में 'मंथ-एंड क्राइसिस' एक कॉमन समस्या बन चुकी है। हालांकि, अगर आप अपनी कुछ छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करें, तो न कि सिर्फ पैसे बचाए जा सकते हैं बल्कि पूरे महीने बिना तनाव के खर्च भी मैनेज किया जा सकता है। तो आइए जानते हैं सैलरी को कैसे मैनेज कर सकते हैं।
क्रेडिट कार्ड का कम से कम इस्तेमाल
क्रेडिट कार्ड की लिमिट को अपनी असली सैलरी समझने की भूल न करें। 'अभी खरीदो, बाद में चुकाओ' की आदत महीने के अंत में भारी ब्याज और ईएमआई (EMI) का बोझ बढ़ा देती है, जिससे अगले महीने का बजट भी बिगड़ जाता है। कार्ड लिमिट के 30 से 40 प्रतिशत से ज्यादा खर्च करना आपको कर्ज के जाल में फंसा सकता हैं।
इमरजेंसी फंड की कमी
जब हम बिना किसी बैकअप के चलते हैं, तो अचानक आने वाला कोई भी मेडिकल खर्च या रिपेयरिंग का काम महीने के बजट को तहस-नहस कर देता है। हर महीने अपनी सैलरी का एक छोटा हिस्सा 'इमरजेंसी फंड' के तौर पर अलग रखें।
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पर्सनल लोन लेने से बचें
पर्सनल लोन लेना आसान जरूर होता है, लेकिन यह अक्सर महंगा पड़ता है। क्योंकि इस पर ब्याज दर ज्यादा होती है और EMI का बोझ लंबे समय तक बना रहता है। छोटी-छोटी जरूरतों के लिए लोन लेने की आदत आपको परेशानी में डाल सकती है।
छोटे खर्चों का हिसाब रखें
रोज का कुछ न कुछ ऑनलाइन ऑर्डर, स्नैक्स ऑर्डर करना या छोटे-छोटे सब्सक्रिप्शन आदि, ये खर्च दिखने में मामूली लगते हैं, लेकिन महीने के अंत में ये हजारों रुपये की सेंध लगा देते हैं। अपने खर्चों को ट्रैक करने के लिए किसी ऐप या डायरी का सहारा लें।
सैलरी आते ही नियम बनाएं
सैलरी आते ही हम सबसे बड़ी गलती यह करते हैं कि बचत के बारे में आखिरी में सोचते हैं। लेकिन सैलरी आते ही एक नियम बना लें कि 50% आप जरूरतों पर खर्च करेंगे, 30% इच्छाओं पर और 20% सीधे बचत में जाना चाहिए।