Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने विज्ञान और अध्यात्म को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि विज्ञान और अध्यात्म के बीच कोई विरोध या टकराव नहीं है। दोनों का उद्देश्य एक ही है, बस उनकी कार्यप्रणाली अलग-अलग है। भागवत ने साफ शब्दों में कहा कि अक्सर यह भ्रम फैलाया जाता है कि विज्ञान और धर्म एक-दूसरे के विपरीत हैं, जबकि सच्चाई यह है कि दोनों ही सत्य की खोज में लगे हुए हैं। उन्होंने यह बात एक विचार गोष्ठी के दौरान कही, जहां शिक्षा, समाज और संस्कृति से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
कार्यप्रणाली अलग, लक्ष्य समान
संघ प्रमुख ने कहा कि विज्ञान प्रयोग, तर्क और प्रमाण के माध्यम से सत्य तक पहुंचने की कोशिश करता है, जबकि अध्यात्म अनुभव, साधना और आत्मचिंतन के रास्ते से उसी सत्य की खोज करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतर केवल पद्धति का है, उद्देश्य का नहीं। भागवत के अनुसार, विज्ञान बाहरी दुनिया को समझने का प्रयास करता है, वहीं अध्यात्म आंतरिक चेतना को जानने पर केंद्रित होता है। दोनों रास्ते अंततः इंसान को सत्य, ज्ञान और मानव कल्याण की ओर ही ले जाते हैं।
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समाज को जोड़ने की जरूरत, टकराव नहीं
मोहन भागवत ने यह भी कहा कि आज के समय में समाज को विज्ञान और अध्यात्म के बीच संतुलन की आवश्यकता है। यदि विज्ञान के साथ मूल्यों और अध्यात्म को जोड़ा जाए, तो मानवता के सामने मौजूद कई समस्याओं का समाधान संभव है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे विज्ञान को अपनाएं, लेकिन अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों को न भूलें। भागवत ने कहा कि सत्य की खोज ही सबसे बड़ा लक्ष्य है और यही विज्ञान व अध्यात्म दोनों की साझा मंजिल है