CBSE 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के कक्षा 12वीं के री-इवैल्युएशन पोर्टल पर आई तकनीकी गड़बड़ियों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बड़ा एक्शन लिया है। अब सीबीएसई की ऑनलाइन प्रणाली को पूरी तरह से ग्लिच फ्री यानि गड़बड़ी से मुक्त बनाने के लिए देश के दो शीर्ष तकनीकी संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (IIT Kanpur) के प्रोफेसरों और तकनीकी विशेषज्ञों की एक विशेष टीम को तैनात किया जा रहा है। यह टीम सीबीएसई की री-इवैल्युएशन प्रक्रिया को सुचारू, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने में बोर्ड की सीधी मदद करेगी।
सर्वर क्रैश की होगी जांच
आपको बता दें कि यह फैसला सीबीएसई के 'पोस्ट एग्जामिनेशन सर्विसेज पोर्टल' पर पिछले कुछ दिनों से लगातार आ रही तकनीकी गड़बड़ियों की वजह से लिया गया है। आईआईटी की दिग्गज विशेषज्ञों की टीम विशेष रूप से इस बात की जांच करेगी कि आखिरी दिनों में अचानक ट्रैफिक बढ़ने पर सर्वर क्यों क्रैश हो जाता है।
'पेमेंट फेलियर' की होगी गहन जांच
विशेषज्ञों की टीम सीबीएसई की वर्तमान डिजिटल प्रणाली में तकनीकी सुधार लागू करेगी ताकि पूरा सिस्टम और मजबूत हो सके। इसके साथ ही टीम इस बात की बारीकी से जांच करेगी कि छात्रों का लॉगिन ऑथेंटिकेशन, यूजर एक्सेस और सबसे महत्वपूर्ण 'पेमेंट गेटवे' पूरी तरह सटीक और दुरुस्त हो, ताकि भविष्य में छात्रों के खातों से गलत या अतिरिक्त पैसे कटने की कोई गुंजाइश न रहे।
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'छात्रों का हित हमारे लिए सर्वोपरि'
इस फैसले के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद प्रधान ने बोर्ड को हिदायत देते हुए दोहराया कि सरकार के लिए छात्रों का हित हमेशा सर्वोपरि रहेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि छात्रों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। सीबीएसई को प्राथमिकता के आधार पर सभी आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत है ताकि एक ऐसी प्रणाली सुनिश्चित की जा सके जो पूरी तरह से पारदर्शी, कुशल और छात्र-अनुकूल हो।
छात्रों को करना पड़ रहा था परेशानियों का सामना
आपको बता दें कि CBSE द्वारा परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद री-इवैल्यूएशन और उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी प्राप्त करने की सेवाएं शुरू की गई थीं। लेकिन बड़ी संख्या में छात्रों द्वारा एक साथ पोर्टल का उपयोग करने के कारण सर्वर पर अत्यधिक दबाव बढ़ गया। इसके चलते कई विद्यार्थियों को पोर्टल लॉगिन करने, फीस भुगतान करने और स्कैन कॉपी डाउनलोड करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर छात्रों ने अपनी परेशानियां बताई। इन समस्याओं को देखते हुए शिक्षा मंत्रालय ने तकनीकी स्तर पर तुरंत सुधार करने का निर्णय लिया।