Sensex Nifty Diwali Rally : दिवाली से पहले भारतीय शेयर बाजार ने ऐसी रफ्तार पकड़ी है, जिसने पिछले साढ़े तीन दशकों के रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए हैं। सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार तेजी के चलते निवेशकों की संपत्ति में बड़ा इजाफा हुआ है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में 1992 में मुहूर्त ट्रेडिंग की शुरुआत के बाद उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पहली बार दिवाली से पहले के सात कारोबारी सत्रों में दोनों प्रमुख सूचकांकों ने 10 फीसदी से ज्यादा की बढ़त दर्ज की है। इस तेजी ने बाजार के इतिहास में नया रिकॉर्ड बना दिया है।
सेंसेक्स-निफ्टी ने पार किए अहम स्तर
दिवाली से पहले के सात कारोबारी दिनों में सेंसेक्स 7,782 अंक यानी 10.6 फीसदी चढ़कर 81 हजार के पार पहुंच गया। वहीं, निफ्टी में 2,331 अंकों की तेजी आई और यह 25 हजार के स्तर से ऊपर निकल गया। शुक्रवार को दोनों सूचकांकों में 2 फीसदी से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। सेंसेक्स 81,028 और निफ्टी 25,030 के स्तर पर बंद हुआ। इससे पहले निफ्टी का दिवाली से पहले सात दिनों का सबसे अच्छा प्रदर्शन 1993 में रहा था, जब इसमें 7.5 फीसदी की तेजी आई थी। साल 2020 में यह बढ़त 6.8 फीसदी थी।
ग्लोबल संकेतों ने बदला बाजार का मूड
विश्लेषकों के मुताबिक, घरेलू बाजार में तेजी के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और आर्थिक वजहें हैं। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के समाधान की उम्मीदें बढ़ी हैं। इसी बीच ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई और भाव 95 डॉलर प्रति बैरल से नीचे पहुंच गए। अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड भी मई में करीब 5.3 फीसदी से घटकर 4.8 फीसदी पर आ गई। कम तेल कीमतों और घटती यील्ड से भारतीय अर्थव्यवस्था तथा रुपये को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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विदेशी निवेशकों ने भी बदला रुख
बाजार की तेजी में विदेशी निवेशकों की खरीदारी का भी योगदान रहा है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह कारोबारी सत्रों में से पांच दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) खरीदार रहे और उन्होंने करीब 18,661 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में नरमी और रुपये की संभावित मजबूती से विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) का प्रवाह दोबारा बढ़ सकता है। हालांकि, अमेरिकी राजनीति और भारत के खिलाफ संभावित व्यापारिक कदमों को लेकर अनिश्चितताएं अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
तेजी के बीच आगे की राह चुनौतीपूर्ण
विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा तेजी कुछ समय तक जारी रह सकती है, लेकिन लंबी अवधि में बाजार की दिशा ऊर्जा कीमतों, भारत के बाहरी आर्थिक संतुलन और कंपनियों की कमाई पर निर्भर करेगी। AI इंफ्रास्ट्रक्चर में वैश्विक निवेश की होड़ भी भारत जैसे उभरते बाजारों से पूंजी खींच सकती है। तकनीकी संकेतकों के मुताबिक, निफ्टी के लिए 24,800 से 25,000 का दायरा अहम है, जबकि 24,300 से 24,400 के स्तर पर तत्काल सपोर्ट माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, आगे लार्ज-कैप और प्रमुख वित्तीय शेयर बाजार की तेजी को नेतृत्व दे सकते हैं।