सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई। सोमवार को शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 650 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी 24,200 के नीचे फिसल गया। बाजार खुलते ही कई प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई।
गिरावट की क्या रही वजह?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, गिरावट के पीछे कई कारण रहे। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों का माहौल कमजोर किया। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और निवेशकों की सतर्कता का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया।
बैंकिंग और आईटी शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव
सोमवार के कारोबार में बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली हुई। कुछ बड़े बैंकों के पहली तिमाही के नतीजे बाजार की उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहे, जिसके बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। इसका सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर पड़ा।
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कच्चे तेल और रुपये ने बढ़ाई चिंता
ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने से भी बाजार पर दबाव बढ़ा। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है। वहीं रुपये की कमजोरी और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने भी निवेशकों का भरोसा प्रभावित किया।
कुछ सेक्टरों ने दिया सहारा
जहां ज्यादातर सेक्टर दबाव में रहे, वहीं कुछ एनर्जी और फार्मा शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में भी मजबूती दर्ज की गई, जिससे बाजार को कुछ सहारा मिला। हालांकि यह तेजी व्यापक गिरावट को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं रही।
निवेशकों के लिए क्या है संदेश?
बाजार में उतार-चढ़ाव वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिस्थितियों से प्रभावित होता है। ऐसे समय में विशेषज्ञ लंबी अवधि के निवेशकों को घबराकर फैसले लेने के बजाय अपने निवेश की समीक्षा करने और जरूरत पड़ने पर वित्तीय सलाहकार की राय लेने की सलाह देते हैं।