
बांग्लादेश में अगले साल फरवरी में चुनाव होने वाले हैं, लेकिन इस बीच देश की राजनीति में हलचल बढ़ गई है. बांग्लादेश के अखबार डेली नया दिगांता की खबर के मुताबिक पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग को सत्ता में वापस लाने की योजना बनाई जा रही है. इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए एस आलम ग्रुप के चेयरमैन सैफुल आलम मसूद सक्रिय हो गए हैं. मसूद ने हाल ही में सऊदी अरब, दुबई, दिल्ली और मुंबई की यात्राएं की हैं. माना जा रहा है कि इन दौरों का संबंध सीधे हसीना की पार्टी की वापसी से जुड़ा है. 2024 के तख्तापलट के बाद शेख हसीना भारत में रह रही हैं, यही वजह है कि मसूद की दिल्ली यात्रा और कथित मुलाकातों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
मसूद ने सऊदी और भारत में आवामी लीग के नेताओं से की मुलाकात
2 अगस्त को मसूद सिंगापुर से सऊदी अरब पहुंचे. उन्होंने Umrah (उमरा) की वजह बताई, लेकिन खबरों के अनुसार मक्का के क्लॉक टॉवर होटल में उन्होंने देश से बाहर रह रहे आवामी लीग के कई नेताओं से मुलाकात की. इसके अलावा वहां एक होटल खरीदने की डील पर भी चर्चा हुई, जिसे कथित तौर पर विदेश से भेजे गए फंड से फंड किया जाना था. इसके बाद 6 अगस्त को मसूद एक स्पेशल फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे. उनके साथ उनकी पत्नी, बेटा और इस्लामी बैंक के पूर्व चेयरमैन भी थे. दिल्ली में उन्होंने ओबेरॉय होटल में कई भगोड़े आवामी नेताओं से मुलाकात की. सबसे महत्वपूर्ण घटना 8 अगस्त की रही.
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शेख हसीना से मिलकर तैयार की रणनीति
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मसूद गुप्त इंतजामों के बीच लुटियन्स जोन पहुंचे और शेख हसीना से लगभग साढ़े पांच घंटे की बैठक की. इस दौरान 4500 करोड़ टका (लगभग 3240 करोड़ रुपये) के फंडिंग की योजना पर चर्चा हुई. फंड का उपयोग अंतरराष्ट्रीय लॉबिंग, राजनीतिक गतिविधियों और पार्टी संगठनों को सक्रिय करने में किया जा सकता है. रिपोर्ट्स के अनुसार शेख हसीना की मांग पर मसूद ने हामी भर दी. 10 अगस्त को एक और मुलाकात हुई, जिसमें मसूद ने 2,500 करोड़ टका तुरंत उपलब्ध कराए और बाकी 2,000 करोड़ नवंबर तक देने का वादा किया. इसके बाद मसूद 11 से 15 अगस्त तक मुंबई के कोकिलाबेन हॉस्पिटल में स्वास्थ्य जांच के लिए रहे. 16 अगस्त को उन्होंने दिल्ली में शेख हसीना से आखिरी मुलाकात की और 17 अगस्त को सिंगापुर लौट गए. इस प्रकार शेख हसीना की पार्टी को सत्ता में लौटाने की योजना अब तेजी से चल रही है. फंडिंग और राजनीतिक तैयारियों के इस ब्लूप्रिंट से बांग्लादेश की आगामी राजनीति में बड़े बदलाव की संभावना है.