Delhi Toxic Air: दिल्ली की हवा से जुड़ी एक नई वैज्ञानिक स्टडी ने गंभीर खतरे की ओर इशारा किया है। शोध में सामने आया है कि राजधानी में रहने और काम करने वाले पुरुषों के फेफड़ों में महिलाओं की तुलना में ज्यादा प्रदूषक कण जमा हो रहे हैं। यह अध्ययन 2019 से 2023 के बीच किया गया, जिसमें दिल्ली के 39 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। वैज्ञानिकों के अनुसार ट्रैफिक में गाड़ी चलाते समय और भीड़भाड़ वाली सड़कों पर पैदल चलते हुए पुरुष अधिक मात्रा में जहरीली हवा सांस के जरिए भीतर ले रहे हैं, जिससे उनके फेफड़ों पर ज्यादा असर पड़ रहा है।
क्यों पुरुषों पर ज्यादा असर
स्टडी में बताया गया है कि पुरुषों की सांस लेने की क्षमता और हवा का प्रवाह महिलाओं से अधिक होता है। इसी वजह से बैठे रहने की स्थिति में पुरुषों के फेफड़ों में PM2.5 कण करीब 1.4 गुना और PM10 कण लगभग 1.34 गुना ज्यादा पहुंचते हैं। पैदल चलते समय भी पुरुषों में ये कण महिलाओं की तुलना में करीब 1.2 गुना अधिक जमा हो रहे हैं। शोध में यह भी पाया गया कि पैदल चलने के दौरान फेफड़ों में प्रदूषण का असर बैठे रहने की तुलना में 2 से 3 गुना तक बढ़ जाता है, जिससे सड़क पर काम करने वाले लोग सबसे ज्यादा जोखिम में हैं।
मानकों से कई गुना ज्यादा प्रदूषण
रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में फेफड़ों तक पहुंचने वाले बारीक कण भारतीय वायु गुणवत्ता मानकों से करीब 10 गुना और विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों से लगभग 40 गुना ज्यादा हैं। शाम के समय ट्रैफिक बढ़ने पर प्रदूषण का असर और गंभीर हो जाता है। वहीं दिवाली के दौरान यह खतरा लगभग दोगुना तक पहुंच जाता है और कई दिनों तक बना रहता है। औद्योगिक और व्यावसायिक इलाकों में स्थिति सबसे खराब पाई गई है, जबकि हरियाली वाले क्षेत्रों में जोखिम कुछ कम है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर ट्रैफिक और औद्योगिक गतिविधियों को नियंत्रित किया जाए, तो प्रदूषण से होने वाले स्वास्थ्य खतरे तेजी से कम किए जा सकते हैं।