सोमवार को सराफा बाजार में चांदी ने ऐसा उतार-चढ़ाव दिखाया कि निवेशक हैरान रह गए। दिन की शुरुआत में MCX पर चांदी के मार्च वायदा भाव 2.54 लाख रुपये प्रति किलो के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गए। ऐसा लग रहा था कि चांदी एक नया रिकॉर्ड कायम करने जा रही है। लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की तस्वीर पूरी तरह बदल गई। एक घंटे के भीतर ही चांदी के भाव फिसलकर करीब 2.32 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गए। यानी एक झटके में 21,500 रुपये की बड़ी गिरावट देखने को मिली, जिसने बाजार में हलचल मचा दी।
अचानक क्यों टूटी चांदी
जानकारों के मुताबिक यह गिरावट किसी एक वजह से नहीं आई, बल्कि तेज उछाल के बाद हुई मुनाफावसूली का नतीजा है। जब चांदी ने रिकॉर्ड स्तर छुआ, तो कई ट्रेडरों ने फायदा सुरक्षित करने के लिए बिकवाली शुरू कर दी। जैसे-जैसे बिक्री बढ़ी, वैसे-वैसे कीमतों पर दबाव आता गया और गिरावट तेज हो गई। बाजार में इसे एक सामान्य प्रक्रिया माना जा रहा है, जहां तेज तेजी के बाद करेक्शन आता है। हालांकि गिरावट की रफ्तार इतनी तेज थी कि निवेशक कुछ देर के लिए असमंजस में पड़ गए।
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ग्लोबल संकेतों का असर
चांदी की चाल पर अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी बड़ा असर दिखा। वैश्विक स्तर पर सिल्वर की कीमतें पहले 80 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचीं, लेकिन इसके बाद गिरकर 75 डॉलर के आसपास आ गईं। इसका सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ा। इसके अलावा यूक्रेन-रूस तनाव में कुछ नरमी की खबरों से सुरक्षित निवेश की मांग थोड़ी कमजोर हुई। जब जोखिम का डर कम होता है, तो निवेशक सोना-चांदी जैसी संपत्तियों से मुनाफा निकालने लगते हैं, जिससे कीमतों में दबाव बढ़ता है।
लंबी अवधि में क्यों मजबूत
हालांकि मौजूदा गिरावट के बावजूद चांदी की लंबी अवधि की तस्वीर अब भी मजबूत मानी जा रही है। पिछले एक साल में चांदी ने करीब 150 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दिया है। दिसंबर 2024 में जहां भाव काफी नीचे थे, वहीं अब कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई के आसपास बनी हुई हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि औद्योगिक मांग, ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन और सोलर पैनल जैसे सेक्टरों में चांदी का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। इसी वजह से आने वाले समय में उतार-चढ़ाव के बावजूद चांदी निवेशकों के लिए चर्चा में बनी रह सकती है।