सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट का दौर लगातार जारी है। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भी बाजार में दोनों कीमती धातुओं पर दबाव दिखा। सबसे ज्यादा चर्चा चांदी की हो रही है, जिसने कुछ समय पहले रिकॉर्ड ऊंचाई छुई थी। अब हालात ऐसे हैं कि तेजी से ऊपर गई चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। इससे निवेशकों के बीच भी चिंता बढ़ने लगी है।
हाई से 1.92 लाख नीचे
एमसीएक्स पर जुलाई एक्सपायरी वाली एक किलो चांदी शुक्रवार को 2,71,866 रुपये पर बंद हुई थी। सोमवार को बाजार खुलते ही यह गिरकर 2,64,949 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। यानी एक ही झटके में कीमत करीब 6,917 रुपये टूट गई। अगर इसके रिकॉर्ड स्तर से तुलना करें तो तस्वीर और चौंकाने वाली है। जनवरी में चांदी 4,57,328 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी। अब वहां से यह करीब 1,92,379 रुपये सस्ती हो चुकी है।
सोने में भी दिखी कमजोरी
सिर्फ चांदी ही नहीं बल्कि सोने की कीमत में भी गिरावट देखने को मिली। 5 जून एक्सपायरी वाला सोना शुक्रवार को 1,58,547 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। सोमवार को कारोबार शुरू होते ही यह लगभग 1,000 रुपये टूटकर 1,57,547 रुपये तक पहुंच गया। हालांकि शुरुआती गिरावट के बाद सोने में कुछ रिकवरी भी दिखाई दी और कीमतों में हल्की मजबूती लौटी।
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रिकॉर्ड से काफी नीचे सोना
सोने ने भी जनवरी में नया इतिहास बनाया था। पहली बार एमसीएक्स पर सोने की कीमत 2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंची थी। इसका रिकॉर्ड स्तर 2,02,984 रुपये तक गया था। अब मौजूदा कीमतों को देखें तो सोना अपने उच्च स्तर से करीब 45,437 रुपये प्रति 10 ग्राम नीचे आ चुका है। इससे साफ है कि दोनों कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है।
गिरावट के पीछे वजह क्या
विशेषज्ञ मानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बदलते हालात, डॉलर की मजबूती और निवेशकों की रणनीति बदलने से कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है। वैश्विक स्तर पर जोखिम कम होने पर निवेशक सुरक्षित निवेश से बाहर निकलते हैं। इसका असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ता है। बाजार की नजर अब आगे आने वाले आर्थिक संकेतों पर टिकी हुई है।
निवेशकों के लिए संकेत
कीमतों में लगातार गिरावट निवेशकों के लिए अवसर और जोखिम दोनों लेकर आई है। कुछ लोग इसे खरीदारी का मौका मान रहे हैं तो कुछ अभी इंतजार के मूड में हैं। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार और डॉलर की चाल से सोना-चांदी की दिशा तय हो सकती है। फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव ने निवेशकों की धड़कनें जरूर बढ़ा दी हैं।