देश के वायदा बाजार से लेकर सर्राफा बाजार तक चांदी के दाम लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। बीते एक महीने में चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है और दाम तीन लाख रुपये के पार पहुंच चुके हैं। हालांकि तेजी के इस दौर के बीच एक्सपर्ट्स अब सतर्क होने की सलाह दे रहे हैं। जानकारों का मानना है कि मौजूदा स्तर पर चांदी काफी महंगी हो चुकी है और आगे चलकर इसमें बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।
क्यों ओवरवैल्यूड मानी जा रही है चांदी
विशेषज्ञों के मुताबिक चांदी की कीमतों में तेजी का बड़ा कारण वैश्विक टैरिफ टेंशन और सुरक्षित निवेश की मांग है। अमेरिका और यूरोप के बीच टैरिफ विवाद ने निवेशकों को कीमती धातुओं की ओर मोड़ा। लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में टैरिफ को लेकर नरमी आ सकती है। इसके अलावा डॉलर इंडेक्स में सुधार भी चांदी पर दबाव बना सकता है। इन कारणों से चांदी की कीमतें नीचे की ओर फिसल सकती हैं।
टारगेट लेवल के बाद आ सकता है झटका
जानकारों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी का अहम स्तर करीब 100 डॉलर प्रति औंस माना जा रहा है। वहीं भारत के वायदा बाजार में इसका टारगेट करीब 3.25 से 3.30 लाख रुपये बताया जा रहा है। अगर चांदी इन स्तरों तक पहुंचती है तो उसके बाद मुनाफावसूली तेज हो सकती है। यही वजह है कि एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि इन ऊंचे स्तरों से चांदी में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।
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निवेशक क्यों बदल सकते हैं रुख
एक और अहम वजह मेटल्स रिप्लेसमेंट थ्योरी मानी जा रही है। चांदी के दाम इतने बढ़ चुके हैं कि निवेशकों का ध्यान अब तांबा और एल्यूमीनियम जैसे दूसरे मेटल्स की ओर जा सकता है। इसके अलावा गोल्ड और सिल्वर का अनुपात भी बेहद निचले स्तर पर पहुंच गया है, जो यह संकेत देता है कि चांदी की मांग जरूरत से ज्यादा बढ़ चुकी है। ऐसे हालात में निवेशक मुनाफा निकालने की ओर बढ़ सकते हैं।
इतिहास में कब आई थी ऐसी गिरावट
इतिहास पर नजर डालें तो चांदी में इससे पहले भी बड़ी गिरावट देखी गई है। साल 1980 में जब चांदी अपने उच्चतम स्तर पर पहुंची थी, तब कुछ ही महीनों में इसमें करीब 70 प्रतिशत तक की गिरावट आई थी। साल 2011 में भी ऐसा ही देखने को मिला था, जब कीमतें चरम पर पहुंचने के बाद तेजी से नीचे आई थीं। विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा हालात उस दौर से काफी मिलते-जुलते हैं।
एक लाख रुपये तक गिर सकते हैं दाम
इन तमाम कारणों को देखते हुए एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि चांदी के दाम मौजूदा ऊंचाई से करीब 30 प्रतिशत तक टूट सकते हैं। इसका मतलब यह है कि तीन लाख रुपये से ऊपर पहुंचने के बाद चांदी एक लाख रुपये या उससे ज्यादा नीचे आ सकती है। जानकारों की राय है कि इतनी महंगी चांदी में आगे रिटर्न सीमित हो सकता है, इसलिए निवेशकों को जल्दबाजी से बचते हुए सोच-समझकर कदम उठाना चाहिए।