दिल्ली हाईकोर्ट ने भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि हर व्यक्ति का जीवन बेहद कीमती है और सरकार की जिम्मेदारी है कि उनकी सेहत पर लगातार नजर रखी जाए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए नियमित स्वास्थ्य निगरानी पर जोर दिया।
सरकार ने क्या बताया?
केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सरकारी डॉक्टर लगातार सोनम वांगचुक की मेडिकल जांच कर रहे हैं। सरकार ने कहा कि जब भी वह जांच की अनुमति देते हैं, डॉक्टर उनका स्वास्थ्य परीक्षण करते हैं। साथ ही जरूरत पड़ने पर तुरंत इलाज और दूसरी मेडिकल सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
कोर्ट ने दिए अहम निर्देश
हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि डॉक्टर नियमित रूप से उनकी जांच करते रहें। अगर मेडिकल रिपोर्ट में हालत बिगड़ने के संकेत मिलें तो बिना देरी जरूरी कदम उठाए जाएं। अदालत ने साफ कहा कि किसी भी स्थिति में उनकी सेहत की अनदेखी नहीं होनी चाहिए और हर जरूरी चिकित्सा सुविधा समय पर मिलनी चाहिए।
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भूख हड़ताल क्यों?
सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनके स्वास्थ्य को लेकर दायर जनहित याचिका में बताया गया कि अब तक उनका करीब 9 किलो वजन कम हो चुका है। इसी आधार पर अदालत से सरकार के हस्तक्षेप और नियमित चिकित्सा निगरानी की मांग की गई थी।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल हाईकोर्ट ने सरकार के जवाब पर संतोष जताया है, लेकिन साफ कर दिया है कि डॉक्टर लगातार उनकी स्थिति पर नजर रखें। अगर स्वास्थ्य में कोई गंभीर बदलाव आता है तो तुरंत जरूरी कार्रवाई की जाए। अदालत ने सरकार से पूरे मामले में संवेदनशीलता बरतने की भी अपेक्षा जताई।
सबकी नजर अगली सुनवाई पर
अब इस मामले में अगली सुनवाई और मेडिकल रिपोर्ट पर सबकी नजर रहेगी। यह भी देखा जाएगा कि सोनम वांगचुक की तबीयत में सुधार होता है या नहीं और सरकार अदालत के निर्देशों का किस तरह पालन करती है। फिलहाल हाईकोर्ट ने साफ संदेश दिया है कि किसी भी नागरिक के जीवन और स्वास्थ्य की सुरक्षा सबसे पहली जिम्मेदारी है।