Sonam Wangchuk Released: सोनम वांगचुक की 170 दिनों बाद रिहाई के बाद उन्होंने भावुक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पहाड़ों में लौटकर और लोगों से मिलकर उन्हें बेहद अच्छा लग रहा है। उन्होंने कहा कि जिस उद्देश्य के लिए वे संघर्ष कर रहे हैं, उसके लिए अब एक नई सुबह की उम्मीद दिख रही है। वांगचुक ने देशभर के उन लोगों का आभार जताया जिन्होंने उनके आंदोलन में समर्थन दिया।
नई शुरुआत का संदेश
जेल से बाहर आने के बाद वांगचुक ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि अब आगे का रास्ता उम्मीद और संवाद से तय होगा। उन्होंने कहा कि वे लोगों से मिलने और उनके साथ मिलकर आगे की रणनीति बनाने के लिए उत्सुक हैं। उनके अनुसार, लद्दाख के मुद्दों को लेकर अब एक बेहतर माहौल बनने की संभावना है।
लद्दाख के मुद्दों पर लचीलापन दिखाया
वांगचुक ने क्षेत्र की राजनीतिक मांगों पर बातचीत के लिए लचीला रुख अपनाने का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि समाधान ऐसा होना चाहिए जिसमें सभी पक्षों का फायदा हो। हालांकि, दूसरी ओर क्षेत्र के कुछ संगठनों ने अपनी प्रमुख मांगों से पीछे हटने से इनकार किया है, जिससे आगे की बातचीत चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
दो अहम मांगों पर केंद्रित रहेगी बातचीत
उन्होंने स्पष्ट किया कि बातचीत मुख्य रूप से दो मुद्दों पर केंद्रित होगी—लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करना और लोकतांत्रिक व्यवस्था की बहाली। वांगचुक ने इसे ‘लेन-देन’ की प्रक्रिया बताते हुए कहा कि अगर दोनों मुद्दों पर सहमति नहीं बनती, तो कम से कम एक पर सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है।
अब खुला संवाद का रास्ता
वांगचुक को National Security Act (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था, जब लेह में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। अब सरकार द्वारा हिरासत आदेश वापस लेने के बाद उनकी रिहाई संभव हो सकी है। इस घटनाक्रम के बाद अब केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के नए दौर की उम्मीद जताई जा रही है।