Sonam Wangchuk Hunger Strike: लंबे समय से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने संकेत दिया है कि वह अपना अनशन समाप्त करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार के सामने कुछ महत्वपूर्ण शर्तें रखी हैं। वांगचुक ने कहा है कि यदि सरकार इन मांगों पर स्पष्ट और ठोस आश्वासन देती है, तभी वह अपनी भूख हड़ताल समाप्त करेंगे। उन्होंने अपनी बात केंद्रीय मंत्रियों जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह को भेजे गए पत्र के माध्यम से रखी है।
युवा प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई नहीं करने की मांग
अपने पत्र में सोनम वांगचुक ने सबसे प्रमुख मांग यह रखी कि आंदोलन में शामिल किसी भी युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई कानूनी, दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई न की जाए। उन्होंने कहा कि इन युवाओं ने केवल निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग उठाई है। उनके अनुसार, सरकार को बिना किसी शर्त के यह भरोसा देना चाहिए कि आंदोलन में भाग लेने वाले छात्रों और युवाओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
संसद में जवाबदेही और पीड़ित परिवारों के लिए राहत की मांग
वांगचुक ने परीक्षा पेपर लीक से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले युवाओं के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग भी दोहराई। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पूरे मामले पर संसद में गंभीर और सार्थक चर्चा होनी चाहिए, ताकि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों पर जवाबदेही तय हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि इस चर्चा के दौरान शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के मुद्दे पर भी विचार किया जाना चाहिए।
‘चलो संसद’ मार्च और पुलिस कार्रवाई पर जताई चिंता
सोनम वांगचुक ने अपने पत्र में कहा कि ‘चलो संसद’ मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन इस दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर उन्होंने चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले लोगों के साथ संवेदनशील व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि भविष्य में भी शांतिपूर्ण आंदोलनों के प्रति सकारात्मक और संतुलित रवैया अपनाया जाए।
स्पष्ट आश्वासन मिलने पर ही टूटेगा अनशन
वांगचुक ने अपने पत्र में लिखा कि कई राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए समाधान निकलने की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि वह भी अपने छात्रों, शिक्षा और अपने कार्यों में लौटना चाहते हैं, लेकिन ऐसा उन युवाओं के हितों की अनदेखी करके नहीं कर सकते, जिनके लिए यह आंदोलन शुरू किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार से लिखित और स्पष्ट आश्वासन मिलने पर ही वह अपनी भूख हड़ताल समाप्त करेंगे, अन्यथा उनका अनशन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा।